आम जैसा दिखने वाला ये फल रोक देता है दिल की धड़कन, इस सुसाइड ट्री से जरा बचकर रहें

Saturday, Dec 10, 2022-04:35 PM (IST)

रांची: झारखंड के रांची जिले से चौंका देने वाला मामला सामने आया है जहां एक ऐसा पेड़ है, जो जीवन देता नहीं है बल्कि ले लेता है। आम के जैसा दिखने वाला इस पेड़ का फल खाने से कुछ देर में मौत हो सकती है। वहीं, इसको सुसाइड ट्री भी कहा जाता है।

इसे कहा जाता है सुसाइड ट्री
जिले के लालगुटवा स्थित वन उत्पादकता केंद्र में ये पेड़ स्थित है। इस पेड़ का नाम सरबेरा ओडोलम है। यह पेड़ देखने में काफी सुंदर व आकर्षक है, लेकिन इसका फल जहरीला है। लोगों को इस पेड़ के नजदीक जाने की अनुमति नहीं है। पेड़ पर इसके नाम के साथ सुसाइड ट्री का बोर्ड भी लगाया गया है। इस पेड़ को जो भी कोई देखेगा वो यही कहेगा कि ये आम का पेड़ है। इस पेड़ के फल का वजन 200 से 250 ग्राम के बीच होता है और इसका फूल सफेद रंग का होता है।

इसे खाने से हो जाता है हार्ट अटैक
कृषि वैज्ञानिक अभिषेक सिन्हा ने बताया कि इस पेड़ को काफी हिफाजत से रखा जाता है क्योंकि इसके फल के बीज में सरबेरीन नामक तत्व पाया जाता है जो विषैला होता है। अगर कोई व्यक्ति यह फल खा ले तो हार्ट अटैक से उसकी मौत हो सकती है। इसके अलावा लिवर व किडनी पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। हालांकि इसके फल में औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। सिन्हा ने बताया भले इसके फल के बीज में जहर है, लेकिन कई औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। एक सीमित मात्रा में उपयोग कर एंटीबैक्टीरियल दवाई बनाई जाती है। इसके अलावा एंटीफंगल, एंटीवायरस, एंटीबायोटिक्स, एंटीटॉक्सिन दवाइयों में इसका उपयोग किया जाता है।

इसे सुंदरवन से लाया गया है
वन उत्पादकता संस्थान के मुख्य तकनीकी पदाधिकारी रविशंकर प्रसाद कहते हैं कि इसे काफी पहले पश्चिम बंगाल के सुंदरवन से झारखंड लाया गया था। इसके बाद यहां की मिट्टी में लगाया गया। उन्होंने कहा कि दूसरे मौसम और मिट्टी में उपजने वाला पेड़ यहां भी फल-फूल गया, यह आश्चर्य की बात है। उन्होंने कहा कि काफी सालों के बाद इस पेड़ में फल और फूल एक साथ देखने को मिल रहा है।

इसके सेवन से रुकने लगती है सांस
रविशंकर प्रसाद ने बताया कि फलों के राजा आम जैसे इस पेड़ के फल के बीज के अंदर एल्कलॉइड पाया जाता है जो दिल और सांस के लिए काफी जहरीला साबित हो सकता है। इसके सेवन से सांस रुकने लगती है और दिल की धड़कन तेज हो जाती है। यह सब मिनटों में इतनी तेजी से होता है कि फल खाने वाले को जान बचाने का मौका तक नहीं मिलता। रविशंकर प्रसाद ने बताया कि ऐसा माना जाता है कि पुराने दौर में राजा-महाराजा इस फल का उपयोग मृत्यु दंड देने में किया करते थे। 


 


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Khushi

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