गैस सिलेंडर की कमी से होटल-रेस्टोरेंट पर संकट, डीजल से जल रहे होटलों के चूल्हे; मेन्यू कीमतों में 20% तक बढ़ोतरी
Wednesday, Mar 25, 2026-04:29 PM (IST)
Jharkhand News: झारखंड के रांची जिले में गैस सिलेंडर की भारी कमी का असर अब सीधे होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर दिखने लगा है। कमर्शियल गैस की सप्लाई लगभग बंद होने से बड़े और छोटे सभी कारोबारियों को महंगे और कठिन विकल्प अपनाने पड़ रहे हैं।
कुछ आइटम को मेन्यू से हटाया गया
शहर में गैस संकट गहराने के कारण होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की परेशानी बढ़ गई है। कमर्शियल गैस नहीं मिलने से बड़े होटल अब डीजल से चलने वाली भट्ठियों का इस्तेमाल करने लगे हैं। हालांकि, इन्हें बनवाने में करीब 45 से 50 हजार रुपये खर्च होते हैं और एक लीटर डीजल में यह भट्ठी केवल आधे से एक घंटे तक ही चल पाती है, जिससे खर्च काफी बढ़ जाता है। वहीं, छोटे होटल, ढाबा और ठेला संचालक गैस की कमी के कारण कोयला और लकड़ी का सहारा ले रहे हैं। बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के कारण कई छोटे कारोबारियों को दुकान बंद करने की नौबत आ रही है। पुरूलिया रोड, सर्कुलर रोड, मेन रोड, रातू रोड, चुटिया और डोरंडा जैसे इलाकों में कई छोटे व्यवसाय प्रभावित हुए हैं।
आम लोगों पर महंगाई का असर
गैस की कमी के बीच कालाबाजारी भी तेजी से बढ़ रही है। होटल संचालकों को मजबूरी में महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। इसका असर खाने-पीने की चीजों पर पड़ा है और कई होटलों ने अपने मेन्यू में करीब 20 प्रतिशत तक कीमत बढ़ा दी है। कुछ आइटम को मेन्यू से हटा भी दिया गया है। गैस के विकल्प के रूप में कोयले की मांग बढ़ने से उसकी कीमत भी दोगुनी हो गई है। पहले 20 किलो कोयला 150-160 रुपये में मिलता था, जो अब 250-260 रुपये तक पहुंच गया है। 40 किलो की बोरी 400-450 रुपये में बिक रही है।
इस महंगाई का असर आम लोगों पर भी पड़ रहा है। लिट्टी जैसे सामान्य खाद्य पदार्थ की कीमत 30 रुपये से बढ़कर 50 रुपये प्रति जोड़ा हो गई है। गैस संकट और बढ़ती महंगाई से लोगों की रसोई और बाहर खाना दोनों महंगा हो गया है। आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।

