सहनी ने 'जननायक' को किया नमन, कहा- अति पिछड़ों को उनका हक मिले, यही कर्पूरी ठाकुर के प्रति होगी सच्ची श्रद्धांजलि

1/24/2023 5:13:22 PM

पटनाः जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती मंगलवार को विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) द्वारा मनाई गई। इस मौके पर वीआईपी के प्रमुख और पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने जननायक की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस मौके पर उपस्थित वीआईपी के कार्यकर्ताओं ने उनके सपनों का बिहार बनाने का संकल्प लिया।

गरीबों के हित में काम करते रहे जननायक
इस मौके पर वीआईपी के प्रमुख मुकेश सहनी ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर जी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। राजनीति में लंबा सफर बिताने के बाद भी जब उनका निधन हुआ तो उनके परिवार को विरासत में देने के लिए एक मकान तक उनके पास नहीं था। वे अपने जीवनकाल में समाज और गरीबों के हित में ही काम करते रहे। सहनी ने कहा कि वीआईपी जननायक के सपनों को पूरा करने के संकल्पों के साथ आगे बढ़ रही है।

33% हो अतिपिछड़ा समाज का आरक्षण
मुकेश सहनी ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर जी ने वर्ष 1978 में ही पिछड़ों एवं अतिपिछड़ों के हित में आरक्षण लागू किया, उसके बाद कई जातियों को समय समय पर SC 1 अर्थात् अतिपिछड़ा वर्ग में जोड़ा गया, लेकिन अतिपिछड़ा का आरक्षण कोटा नहीं बढ़ाया गया। इससे पुराने जातियों को नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि आज जातीय गणना का कार्य प्रारंभ हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक, बिहार में अतिपिछड़ा समाज की जनसंख्या 35% से अधिक है, लेकिन आरक्षण सिर्फ 18% ही मिलता है। उन्होंने कहा कि जितनी संख्या है हमारी, चाहिए उतनी ही हिस्सेदारों' के तर्ज पर अतिपिछड़ा समाज के 18% आरक्षण को बढ़ाकर 33% करना चाहिए।

'सन ऑफ मल्लाह' के नाम से चर्चित सहनी ने कहा कि बिहार सरकार को भी अन्य कुछ राज्यों की तरह आरक्षण बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक अतिपिछड़ा का बेटा होने के वजह से मैं दर्द समझता हूं। उन्होंने कहा कि मैं और मेरी पार्टी अतिपिछड़ा के हक एवं अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि अति पिछड़ों को उचित हिस्सा मिले, यही जननायक के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इधर, कार्यक्रम में भाग ले रहे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता देव ज्योति ने कहा कि जननायक मुख्यमंत्री बने तो बिहार में पिछड़े वर्गों के लिए मुंगेरी लाल आयोग की अनुशंसा लागू कर आरक्षण का रास्ता खोल दिया। उन्हें अपनी सरकार की कुर्बानी देनी पड़ी, लेकिन जननायक अपने संकल्प से विचलित नहीं हुए।


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Ramanjot

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