प्रशांत किशोर को बड़ा झटका, बिहार चुनाव रद्द करने की याचिका खारिज, SC ने लगाई कड़ी फटकार
Friday, Feb 06, 2026-12:58 PM (IST)
Supreme Court Jan Suraj : उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने पूर्व राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की जन सुराज पार्टी (Jan Suraj Party) द्वारा दायर उस याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया जिसमें 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव को चुनौती दी गई थी।
पार्टी ने मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए एक कल्याणकारी योजना के कथित दुरुपयोग के विरोध में राज्य में नए सिरे से चुनाव कराए जाने का अनुरोध किया था। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की। बेंच ने प्रशांत किशोर की अगुवाई वाली जन सुराज पार्टी को अपनी शिकायतें लेकर पटना हाई कोर्ट जाने को कहा है। याचिका में बिहार सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसके तहत चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का कथित तौर पर उल्लंघन करते हुए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिला लाभार्थियों को 10-10 हजार रुपये हस्तांतरित किए गए थे।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ''हम किसी राजनीतिक दल के कहने पर पूरे राज्य के लिए व्यापक निर्देश जारी नहीं कर सकते।'' पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सी यू सिंह को इस आधार पर पटना उच्च न्यायालय में जाने के लिए कहा कि यह मुद्दा सिर्फ एक राज्य से संबंधित है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 243 सदस्यीय विधानसभा में 202 सीट जीतकर सत्ता बरकरार रखी और विपक्षी दलों के 'इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस' ('इंडिया' गठबंधन) ने 35 सीट हासिल की जबकि जन सुराज पार्टी (जेएसपी) का खाता भी नहीं खुल पाया और उसके अधिकतर उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।
जन सुराज पार्टी ने बिहार में नए सिरे से चुनाव कराने का अनुरोध करते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। याचिका में राज्य सरकार पर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिला लाभार्थियों को दस-दस हजार रुपये हस्तांतरित करके चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया और संविधान के अनुच्छेद 324 एवं लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत कार्रवाई का अनुरोध किया गया है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना राज्य में स्वरोजगार और लघु व्यवसायों को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं को 10-10 हजार रुपये का प्रारंभिक वित्तीय अनुदान प्रदान करती है। आरोप है कि कर्ज में डूबे राज्य ने चुनाव से ठीक पहले 15,600 करोड़ रुपये बांट दिए जिससे अन्य राजनीतिक दलों को समान अवसर नहीं मिल पाए।

