95 की उम्र में भी नहीं थमे कदम, पद्मश्री डॉ. गोपालजी त्रिवेदी ने पुराने लीची पेड़ों को दिया नया जीवन; बढ़ी किसानों की आय

Monday, Mar 30, 2026-12:48 PM (IST)

Dr. Gopalji Trivedi: उम्र के 95वें पड़ाव पर जहां लोग विश्राम चुनते हैं, वहीं विज्ञान और इंजीनियरिंग श्रेणी में पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध कृषि विज्ञानी डॉ. गोपालजी त्रिवेदी आज भी खेतों की मिट्टी और किसानों की प्रगति के लिए समर्पित हैं। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के अद्भुत संगम से उन्होंने न केवल मुजफ्फरपुर की शाही लीची के पुराने बागों को पुनर्जीवित किया है, बल्कि जलजमाव वाले क्षेत्रों को 'सोना' उगाने वाली जमीन में बदल दिया है। 

कैनोपी मैनेजमेंट: पुराने पेड़ों को मिला 'नया जन्म' 

मुजफ्फरपुर के करीब 12 हजार हेक्टेयर में फैले लीची के बागों में 40-50 साल पुराने पेड़ अब अनुत्पादक हो रहे थे। डॉ. त्रिवेदी ने वर्ष 2003 में 'पुनर्जीवन कैनोपी मैनेजमेंट' तकनीक पेश की। इस तकनीक की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं: 

छंटाई (Pruning): ऊंचे और घने पेड़ों को 1.5 मीटर की ऊंचाई तक छोटा किया जाता है। 

प्रकाश और वायु: टहनियां कम होने से सूरज की रोशनी तने तक पहुंचती है, जिससे कीटों का प्रकोप घटता है। 

पोषक तत्व: कटाई के बाद गोबर की खाद और सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग किया जाता है। 

राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. विकास दास के अनुसार, इस तकनीक से बिहार में लगभग 5,000 हेक्टेयर बागों का कायाकल्प हुआ है। किसानों का अनुभव है कि जहां पहले 100 किलो फल मिलता था, अब वहां 115 किलो तक गुणवत्तापूर्ण उत्पादन हो रहा है। 

'बाबा परियोजना' से जलजमाव बना वरदान 

डॉ. त्रिवेदी ने उत्तर बिहार की बड़ी समस्या 'जलजमाव' को अवसर में बदल दिया। उन्होंने 'बाबा परियोजना' (बिहार एक्वाकल्चर बेस्ड एग्रीकल्चर) के माध्यम से 86 एकड़ परती भूमि को एकीकृत खेती के मॉडल में तब्दील किया। 

परियोजना का घटक  प्रभाव 
मत्स्य पालन   जलजमाव वाले क्षेत्र का आर्थिक उपयोग।
मखाना व सिंघाड़ा नकदी फसलों के माध्यम से आय में वृद्धि।
रोजगार 30 प्रत्यक्ष और 200 परोक्ष लोगों को काम मिला।
पर्यावरण   भूजल स्तर (Groundwater level) में उल्लेखनीय सुधार। 


जेपी और नानाजी देशमुख के साथ सामाजिक बदलाव की यात्रा 

डॉ. त्रिवेदी का सफर केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहा। 1988 से 1991 तक डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति रहे डॉ. गोपालजी को लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने मुशहरी के माओवाद प्रभावित इलाकों में कृषि के जरिए शांति लाने की जिम्मेदारी दी थी। बाद में उन्होंने नानाजी देशमुख के साथ चित्रकूट और गोंडा में ग्रामीण विकास के मॉडलों पर भी काम किया। डॉ. गोपालजी त्रिवेदी का कहना है, "मेरा लक्ष्य हमेशा से यही रहा है कि तकनीक ऐसी हो जो सीधे किसान की जेब तक पहुँचे और पर्यावरण को भी सुरक्षित रखे।"
 


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Ramanjot

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