गिरिडीह सदर अस्पताल में अचानक बिजली गुल: डॉक्टरों ने मोबाइल की रोशनी में किया मरीजों का इलाज; स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

Monday, Mar 16, 2026-02:17 PM (IST)

Jharkhand News: झारखंड के गिरिडीह सदर अस्पताल में बीते शनिवार देर रात अचानक बिजली गुल हो जाने से स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए। करीब आधे घंटे तक अस्पताल अंधेरे में डूबा रहा, जिसके कारण डॉक्टरों को मोबाइल की रोशनी में मरीजों का इलाज करना पड़ा।

राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
जिले के सदर अस्पताल में शनिवार रात करीब 11:30 बजे अचानक बिजली चली गई। बिजली जाते ही पूरा अस्पताल परिसर अंधेरे में डूब गया और इलाज की व्यवस्था प्रभावित हो गई। करीब आधे घंटे तक अस्पताल में बिजली नहीं रहने से डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को काफी परेशानी हुई। इमरजेंसी वार्ड समेत कई विभागों में अंधेरा छाया रहा। करीब रात 12 बजे बिजली विभाग के कर्मचारियों ने जनरेटर चालू किया, जिसके बाद स्थिति कुछ हद तक सामान्य हो सकी। इस घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दलों और स्थानीय लोगों ने इस मामले को लेकर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी को भी घेरा है। उनका कहना है कि जब जिला मुख्यालय के अस्पताल की यह हालत है, तो ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

मोबाइल की रोशनी में किया गया मरीजों का इलाज
बिजली नहीं रहने के कारण डॉक्टरों को मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट की मदद से मरीजों की जांच करनी पड़ी। मरीजों के परिजनों ने भी अपने मोबाइल की रोशनी जलाकर डॉक्टरों की मदद की, तब जाकर मरीजों की रिपोर्ट देखी जा सकी और इलाज हो पाया। यह स्थिति अस्पताल की आपातकालीन तैयारियों पर सवाल खड़े करती है। बीते शनिवार की घटना के बाद रविवार शाम को भी अस्पताल की बिजली व्यवस्था एक बार फिर ठप हो गई। इसी दौरान मुफस्सिल थाना क्षेत्र के तिगोंजोरी गांव के नीलमुनि देवी, अजय हेम्ब्रम, अनुष्का हेम्ब्रम, विजय किस्कु और पवन किस्कु बाइक और ऑटो की टक्कर में घायल होकर अस्पताल पहुंचे। लेकिन अस्पताल में अंधेरा होने के कारण डॉक्टरों को उनका इलाज करने में परेशानी हुई।

घायल के परिजन काली सोरेन ने बताया कि जब वे अस्पताल पहुंचे तो चारों ओर अंधेरा था। यहां तक कि ड्रेसिंग रूम में भी रोशनी की कोई व्यवस्था नहीं थी। एक घायल का सिर फटा हुआ था, जिसे डॉक्टरों ने मोबाइल की रोशनी में ही टांके लगाकर इलाज किया।


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Khushi

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