World Sleep Day: देर रात मोबाइल चलाना बन रहा नींद का दुश्मन, अनिद्रा से युवाओं में बढ़ रहा बीपी और तनाव; जानें क्या कहते हैं Doctors
Friday, Mar 13, 2026-05:25 PM (IST)
Jharkhand News: बदलती जीवनशैली और मोबाइल-लैपटॉप के बढ़ते इस्तेमाल के कारण लोगों में अनिद्रा (नींद न आना) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। देर रात तक स्क्रीन देखने की आदत से तनाव बढ़ रहा है और लोगों की नींद प्रभावित हो रही है। चिकित्सकों के अनुसार धनबाद में बड़ी संख्या में लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं।
लगभग 8 लाख लोग अनिद्रा से परेशान
हाउसिंग कॉलोनी के रहने वाले 32 वर्षीय राकेश शर्मा इन दिनों काफी चिड़चिड़े रहने लगे हैं। छोटी-छोटी बातों पर उन्हें गुस्सा आ जाता है और उनका ब्लड प्रेशर भी तेजी से बढ़ने लगा है। जब उन्होंने डॉक्टर से जांच कराई तो पता चला कि उनकी समस्या की मुख्य वजह अनिद्रा है। डॉक्टरों के अनुसार राकेश पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहे हैं और इसका मुख्य कारण मोबाइल और अन्य स्क्रीन का अत्यधिक इस्तेमाल है। देर रात तक स्क्रीन देखने से तनाव बढ़ता है और नींद प्रभावित होती है। धनबाद में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। यहां लगभग 8 लाख लोग अनिद्रा से परेशान हैं। हर दिन बड़ी संख्या में लोग एसएनएमएमसीएच और सदर अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
अच्छी नींद शरीर और दिमाग दोनों के लिए बेहद जरूरी
सदर अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. संजय कुमार बताते हैं कि अच्छी नींद शरीर और दिमाग दोनों के लिए बेहद जरूरी है। इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है, दिमाग स्वस्थ रहता है और याददाश्त मजबूत होती है। उन्होंने बताया कि बदलती दिनचर्या, गलत खानपान और रोजाना 4 से 7 घंटे तक मोबाइल या अन्य स्क्रीन पर समय बिताने से अनिद्रा की समस्या बढ़ रही है। ओपीडी में आने वाले लगभग 70 प्रतिशत मरीजों में यह परेशानी देखी जा रही है। डॉ. संजय के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बिस्तर पर जाने के 35 से 40 मिनट बाद भी नहीं सो पाता है तो इसे अनिद्रा माना जाता है। खासकर 17 से 35 वर्ष के युवाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जा रही है। लगभग 72 प्रतिशत युवा देर रात तक फिल्में देखना, गेम खेलना, रील्स देखना या चैट करना जैसे काम करते रहते हैं।
उम्र के अनुसार कितनी नींद जरूरी
डॉ. संजय बताते हैं कि हर उम्र के लोगों को अलग-अलग समय की नींद की जरूरत होती है।
शिशु (0-3 महीने): 13-17 घंटे
बच्चे (1-2 साल): 10-14 घंटे
प्री-स्कूल (3-5 वर्ष): 9-13 घंटे
स्कूल जाने वाले बच्चे (6-13 वर्ष): 9-12 घंटे
किशोर (14-17 वर्ष): 8-11 घंटे
वयस्क (18-64 वर्ष): 7-9 घंटे
वरिष्ठ नागरिक (65 वर्ष से अधिक): 7-8 घंटे
नींद क्यों जरूरी है
डॉक्टरों के अनुसार अच्छी नींद से शरीर को ताकत और ऊर्जा मिलती है। यह दिमाग को स्वस्थ रखती है और याददाश्त मजबूत बनाती है। इसके साथ ही नींद रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है और भावनात्मक व मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। नींद की कमी से अनिद्रा, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, थायरॉयड और हृदय रोग जैसी कई बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

