Rural Employment Bihar: अब गांव में भी रोजगार कर लखपति बन रहे ग्रामीण, जानिए कैसे हो रही कमाई

Monday, Jan 05, 2026-09:07 PM (IST)

Bihar News: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कल्याणकारी योजनाओं की मदद से प्रदेश के ग्रामीणों ने नये-नये स्व-रोजगार उत्पन्न करके आत्मनिर्भरता व सशक्त बिहार के निर्माण की नयी गाथा लिखी है। बिहार में विकास का प्रतीक बन चुके सतत जीविकोपार्जन योजना से 20 सालों में गरीबों की आमदनी लगभग दोगुनी होते जा रही है। आंकड़ों की मानें तो ग्रामीण क्षेत्रों में लोग बकरी पालन, पोल्ट्री फार्म और डेयरी के कारोबार से साल में करीब एक से डेढ़ लाख तक की अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं। 
ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पशुपालन के लिए पुरुषों के साथ महिलाएं भी तेजी से अपनी दिलचस्पी दिखा रही हैं। इसी का नतीजा है कि राज्य में करीब 5 सालों में लाखों की संख्या में लोग पशुपालन के कारोबार से जुड़े हैं।

कोराना काल से 8.12 लाख परिवार ने शुरू किया पशुपालन कारोबार, कमा रहे लाखों

आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2020-21 यानि कोरोना काल के बाद बिहार में बकरी पालन के व्यवसाय से 8.12 लाख परिवार जुड़ा। इसी तरह से 2.24 लाख परिवार पोल्ट्री फॉर्म से जुड़कर खुद के लिए नया रोजगार खड़ा कर चुके है। सरकार ने मनरेगा के तहत इन पशुपालकों के लिए शेड निर्माण व पोल्ट्री फार्म के लिए हजारों करोड़ रुपए खर्च किए। प्रदेश में गरीब और एससी, एसटी वर्ग के लोगों के लिए सतत जीविकोपार्जन योजना अतिरिक्त कमाई के क्षेत्र में वरदान साबित हो रही है। प्रति परिवार पशुपालन के अलग-अलग व्यवसाय से हर महीने आठ से 10 हजार रुपए की आमदनी आसानी से कर ले रहा है। 

पशुपालन के लिए ग्रामीण को ऋण पर मिल रही विशेष छूट

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पशुपालन के क्षेत्र में समूह से जुड़ने के बाद ऋण के ब्याज में भी बैंकों से लोगों को विशेष छूट दी जा रही है। इसका असर यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब लोग महिला-पुरुष, एससी- एसटी वर्ग के लोग तेजी के साथ बकरी पालन, पोल्ट्री फार्म, डेयरी, मत्स्य पालन आदि व्यवसाय से जुड़े हैं। आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन के क्षेत्र में न सिर्फ एक क्रांति दिखेगी बल्कि लाखों लोगों के लिए रोजगार का सुलभ मार्ग भी प्रशस्त होगा।

जीविका दीदी आसानी से ग्राम सभा से कर रही आवेदन

सतत जीविकोपार्जन योजना के तहत पशुपालन के क्षेत्र में सरकारी सहयोग प्राप्त करने के लिए लोगों को सबसे पहले ग्राम सभा, पूरक ग्राम सभा के माध्यम से आवेदन करना होता है। इस योजना में गरीब परिवारों के साथ एससी, एसटी वर्ग के लोगों को प्राथमिकता दी जाती है। आवेदन मिलने के बाद विभाग लाभुकों का एक यूनिक कोड जनरेट करता है। फिर बकरी पालन, पोल्ट्री फार्म, सुअर पालन, डेयरी आदि के कारोबार के लिए विभाग शेड बनवाकर देता है। शेड तैयार होने के बाद इसे समूह को हैंडओवर किया जाता है। समूह के माध्यम से लोगों को बैंकों से लोन प्राप्त होता है। यह लोन न्यूनतम ब्याज पर निर्धारित किस्तों में भरना होता है। 

सतत जीविका योजना के तहत राज्य में तेजी से बढ़ रहा पशुपालन का कारोबार

 

  • राज्य में बकरी पालन से जुड़ा परिवार, 8.12 लाख
  • पोल्ट्री फार्म उद्योग से जुड़ा परिवार, 2.24 लाख
  • डेयरी उद्योग से जुड़ा परिवार, 1.75 लाख
  • मत्स्य पालन से जुड़ा परिवार, 751

मंत्री श्रवण कुमार ने योजना की सफलता को सराहा

ग्रामीण विकास सह परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि पशुपालन गांवों के विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गया है। इसके सहारे किसानों की आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है। विभाग जरूरतमंदों को योजना का लाभ देने के साथ ही पशुओं के स्वास्थ्य और उनके पोषण पर केंद्रित गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में ग्रामीण अंचलों में पशुपालन आर्थिक मजबूती के क्षेत्र में एक क्रांति लायेगा। 


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Ramanjot

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