Bihar Politics: बिहार को मिल सकता है पहला BJP सीएम, रेस में सबसे आगे हैं ये 4 नाम

Thursday, Mar 05, 2026-11:02 AM (IST)

Bihar Politics: बिहार की राजनीति उस मोड़ पर खड़ी है जहां से सत्ता का पूरा समीकरण बदलने के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अचानक राज्यसभा जाने और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की संभावनाओं ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। यदि ये अटकलें हकीकत में बदलती हैं, तो बिहार के इतिहास में पहली बार 'सुशासन' की कमान सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के हाथों में आ सकती है। हालांकि, राजग (NDA) के घटक दल और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने फिलहाल नेतृत्व परिवर्तन की किसी भी संभावना से इनकार किया है, लेकिन अंदरखाने नए चेहरों और समीकरणों पर चर्चाएं जोरों पर हैं। 

क्या है 'प्लान बी'? निशांत कुमार की एंट्री की चर्चा 

सियासी गलियारों में एक खास फॉर्मूले पर चर्चा तेज है। माना जा रहा है कि यदि नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में सक्रिय होते हैं, तो भाजपा राज्य में अपना मुख्यमंत्री बना सकती है। सत्ता संतुलन बनाए रखने के लिए नीतीश के बेटे निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) बनाकर जदयू के वोट बैंक और विरासत को सुरक्षित रखने की कोशिश की जा सकती है। 

भाजपा के 'सीएम' चेहरे: कौन है रेस में सबसे आगे? 

अगर बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बनता है, तो इसके लिए कई कद्दावर नामों पर दांव लगाया जा सकता है: 

सम्राट चौधरी: वर्तमान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी इस रेस में सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। कोइरी (OBC) समुदाय से आने वाले चौधरी ने हाल के वर्षों में भाजपा को राज्य में मजबूती दी है और संगठन पर उनकी पकड़ भी मजबूत है। 

नित्यानंद राय: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के बेहद भरोसेमंद माने जाते हैं। यादव समुदाय से होने के कारण वे राजद के आधार वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए भाजपा का सबसे बड़ा दांव हो सकते हैं। 

विजय सिन्हा और मंगल पांडे: सरकार और संगठन का लंबा अनुभव रखने वाले विजय सिन्हा और मंगल पांडे के नामों पर भी विचार किया जा सकता है। 

क्या भाजपा देगी 'सरप्राइज'? 
इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि भाजपा आलाकमान बिहार में भी किसी 'डार्क हॉर्स' या बिल्कुल नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर सबको चौंका दे। फिलहाल, सबकी नजरें गुरुवार को होने वाले राज्यसभा नामांकन और उसके बाद के राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हैं। 


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Ramanjot

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