Mahila Rojgar Yojana : ₹10,000 तो मिल गए, अब 2 लाख रुपए के लिए पूरी करनी होंगी ये शर्तें! जानें कब मिलेंगे पैसे
Monday, Feb 09, 2026-01:50 PM (IST)
Mahila Rojgar Yojana : बिहार सरकार ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' के तहत एक नया और कड़ा ब्लूप्रिंट तैयार किया है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि अब केवल आवेदन करना सफलता की गारंटी नहीं होगा। ₹2,00,000 तक की कुल सहायता राशि पाने के लिए महिलाओं को हर कदम पर अपनी योग्यता और व्यावसायिक प्रगति को साबित करना होगा।
योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका 'परफॉर्मेंस-लिंक्ड मॉडल' है। यानी अगली किस्त तभी मिलेगी जब पिछली राशि का सही इस्तेमाल और व्यापार में वृद्धि दिखाई देगी।
किस्त-दर-किस्त: आत्मनिर्भरता का सफर
सरकार ने ₹2,00,000 की राशि को पांच चरणों में विभाजित किया है। पहले चरण में 1.56 करोड़ महिलाओं को ₹10,000 की शुरुआती मदद दी जा चुकी है। आगे का सफर इस प्रकार है:
| चरण | सहायता राशि | मुख्य शर्तें और लक्ष्य |
| दूसरी किस्त | ₹20,000 | पहली किस्त का उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC), SHG मीटिंग में नियमित उपस्थिति और 3 महीने की निरंतर बचत। |
| तीसरी किस्त | ₹40,000 | उद्यमिता प्रशिक्षण, बिजनेस विस्तार प्लान, एक अन्य व्यक्ति को रोजगार देना और बिजनेस का बीमा कराना। |
| चौथी किस्त | ₹80,000 | लगातार 3 महीने का लाभ दिखाना, बैंक में प्रतिमाह ₹1,000 की बचत और स्थायी संपत्ति का निर्माण। |
| पांचवीं किस्त | ₹60,000 | ब्रांडिंग-मार्केटिंग प्लान, ₹8,000/माह औसत आय और कुल संपत्ति में 50% की वृद्धि। |
कड़े नियमों के पीछे का विजन
सरकार ने इन शर्तों को शामिल कर यह साफ कर दिया है कि उसका लक्ष्य सिर्फ आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि जमीन पर सफल बिजनेस खड़े करना है।
वित्तीय अनुशासन: नियमित बचत और बैंक ट्रांजेक्शन के जरिए महिलाओं को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ना।
जोखिम प्रबंधन: तीसरे चरण से ही बीमा (Insurance) को अनिवार्य किया गया है ताकि किसी आपदा की स्थिति में व्यवसाय बंद न हो।
बाजार में पकड़: अंतिम चरण में ब्रांडिंग और पैकेजिंग पर जोर दिया गया है, ताकि उत्पाद केवल स्थानीय स्तर तक सीमित न रहें।
अधिकारियों का कहना है कि "हम महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि एक अनुशासित उद्यमी के रूप में देखना चाहते हैं। हर किस्त परफॉर्मेंस से जुड़ी है, जो यह सुनिश्चित करती है कि सरकारी पैसा सीधे विकास में लगे।"

