2026 की पहली पूर्णिमा: वुल्फ मून सुपरमून का अद्भुत नजारा, आकाश में चमकेगा विशाल चंद्रमा

Saturday, Jan 03, 2026-08:48 AM (IST)

Full Moon Supermoon: नया साल शुरू होते ही आकाश में एक शानदार खगोलीय घटना घटित हो रही है। जनवरी 2026 की पहली पूर्णिमा, जिसे वुल्फ मून के नाम से जाना जाता है, एक सुपरमून के रूप में उभरेगी। यह चंद्रमा सामान्य से कहीं बड़ा और चमकीला दिखाई देगा, जो रात के आकाश को रोशनी से भर देगा।

पूर्णिमा तब होती है जब चंद्रमा सूर्य के ठीक विपरीत दिशा में होता है, जिससे उसकी पूरी सतह पृथ्वी से पूरी तरह रोशनी से चमकती दिखती है। यह घटना हर 27 दिन में एक बार होती है। जनवरी की यह पूर्णिमा 3 जनवरी 2026 को सुबह करीब 3:33 बजे IST पर अपने चरम पर पहुंचेगी, लेकिन आसपास की रातों में भी चंद्रमा लगभग पूरी तरह गोल और चमकीला नजर आएगा। आपके स्थान के अनुसार चंद्रमा उदय और अस्त का समय अलग हो सकता है।

वुल्फ मून क्यों कहते हैं?

इस पूर्णिमा को वुल्फ मून इसलिए कहा जाता है क्योंकि सर्दियों की लंबी रातों में भूखे भेड़िए अक्सर भौंकते या चिल्लाते सुनाई देते थे। एंग्लो-सैक्सन परंपरा में इसे "मून आफ्टर यूल" भी कहते हैं, जबकि उत्तरी अमेरिका के कुछ आदिवासी समुदाय इसे कड़ाके की ठंड को दर्शाने के लिए "सीवियर मून" नाम देते हैं।


यह सुपरमून इसलिए खास है क्योंकि चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे निकट बिंदु (पेरिगी) पर होगा। इससे चंद्रमा सामान्य से 14% बड़ा और 30% अधिक चमकीला दिखेगा। यह लगातार चार सुपरमून की श्रृंखला का आखिरी है, इसके बाद अगला सुपरमून नवंबर 2026 में दिखेगा।

वुल्फ मून को कब और कैसे देखें?

2 जनवरी की शाम को पूर्वी क्षितिज की ओर देखें, जहां चंद्रमा सूर्यास्त के आसपास उदय होगा। क्षितिज के निकट होने से "मून इल्यूजन" प्रभाव के कारण चंद्रमा बेहद विशाल लगेगा। 3 जनवरी को सूर्यास्त के बाद अंधेरे आकाश में उदय होने पर यह प्रभाव और मजबूत होगा। क्षितिज के पास चंद्रमा नारंगी-पीला रंग का दिखेगा, क्योंकि उसकी रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरते हुए नीले रंग की किरणें बिखर जाती हैं और लाल-नारंगी किरणें पहुंचती हैं। 3 जनवरी को चंद्रमा के दाहिनी ओर चमकीला बृहस्पति ग्रह करीब 4 डिग्री की दूरी पर चमकेगा, जो आकाश में एक खूबसूरत जोड़ी बनाएगा।


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Ramanjot

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