राज्यसभा सीट पर सियासी संग्राम! जीतन राम मांझी ने NDA को याद दिलाया ‘पुराना वादा’
Saturday, Feb 28, 2026-08:51 PM (IST)
पटना: राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। पांच सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले सहयोगी दलों के बीच दावेदारी खुलकर सामने आ रही है। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि उनकी पार्टी राज्यसभा की एक सीट की हकदार है।
गया में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मांझी ने कहा कि 2024 लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए नेतृत्व ने उनकी पार्टी से दो लोकसभा और एक राज्यसभा सीट देने का आश्वासन दिया था। उनका दावा है कि लोकसभा का वादा पूरा हुआ, लेकिन राज्यसभा की सीट अब तक नहीं मिली। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह दबाव की राजनीति नहीं कर रहे, लेकिन सहयोगी दल होने के नाते एक सीट मिलनी चाहिए।
चुनाव कार्यक्रम और खाली होने वाली सीटें
निर्वाचन आयोग ने पांच राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम जारी किया है। ये सीटें अप्रैल 2026 में खाली हो रही हैं।
- हरिवंश नारायण सिंह (जेडीयू)
- राम नाथ ठाकुर (जेडीयू)
- प्रेम चंद गुप्ता (आरजेडी)
- अमरेंद्र धारी सिंह (आरजेडी)
- उपेंद्र कुशवाहा (आरएलएम)
महत्वपूर्ण तिथियां:
- नामांकन की अंतिम तिथि: 5 मार्च 2026
- जांच: 6 मार्च 2026
- नाम वापसी: 9 मार्च 2026
- मतदान: 16 मार्च 2026 (विधानसभा परिसर में)
NDA का गणित क्या कहता है?
243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए के पास 202 विधायक हैं। एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए लगभग 41 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है। इस आधार पर एनडीए चार सीटें आराम से जीत सकता है।
हालांकि, पांचवीं सीट को लेकर समीकरण जटिल हो सकते हैं। भाजपा और जेडीयू के अलावा सहयोगी दल—जैसे आरएलएम, एलजेपी (राम विलास) और HAM—भी दावेदारी कर रहे हैं। मांझी की मांग ने पांचवीं सीट के लिए प्रतिस्पर्धा को और दिलचस्प बना दिया है।
महागठबंधन की स्थिति
विपक्षी महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक हैं, जो एक सीट के लिए जरूरी संख्या से कम हैं। ऐसे में उन्हें अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी। आरजेडी ने संकेत दिया है कि वह पांचवीं सीट पर उम्मीदवार उतार सकती है। दूसरी ओर, कुछ छोटे दल भी स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। इस स्थिति में क्रॉस-वोटिंग और रणनीतिक समझौते अहम भूमिका निभा सकते हैं।
क्या बढ़ेगा NDA में तनाव?
राज्यसभा चुनाव अक्सर दलों के भीतर संतुलन और सहयोगियों के महत्व को सामने लाते हैं। मांझी की सार्वजनिक दावेदारी से यह साफ है कि छोटे सहयोगी दल भी अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी सुनिश्चित करना चाहते हैं। अब नजर 16 मार्च पर टिकी है, जब मतदान के जरिए तस्वीर साफ होगी कि पांचवीं सीट किसके खाते में जाती है और एनडीए के भीतर संतुलन कैसे बनता है।

