'नीतीश कुमार को शपथ लेने की बधाई नहीं दूंगा...', जीतन राम मांझी ने दिया चौंकानें वाला बयान, जानें ऐसा क्यों कहा?
Friday, Apr 10, 2026-03:46 PM (IST)
Bihar News : बिहार से राज्यसभा के लिए नवनिर्वाचित सदस्य नीतीश कुमार ने शुक्रवार को संसद भवन में सदन की सदस्यता शपथ ली। नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने पर उन्हें लगातार बधाई और शुभकामनाएं मिल रही है। इस बीच केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स के जरिए पोस्ट शेयर कर कहा कि वह नीतीश कुमार को बधाई नहीं देंगे।
अपने एक्स पोस्ट में जीतन राम मांझी ने लिखा, आज मैं नीतीश जी को राज्यसभा के सदस्य के तौर पर शपथ लेने की बधाई नहीं दूंगा। बस इतना कहूंगा, ‘बिहार विल मिस यू नीतीश जी। ये मैं ही नहीं पूरे बिहार की जनता कह रही है।’
आज मैं नीतीश जी को राज्यसभा के सदस्य के तौर पर शपथ लेने की बधाई नहीं दूँगा।
— Jitan Ram Manjhi (@jitanrmanjhi) April 10, 2026
बस इतना कहूँगा।
“बिहार विल मिस यू नीतीश जी।”
ये मैं ही नहीं पूरे बिहार की जनता कह रही है।@NitishKumar @VPIndia
प्रधानमंत्री मोदी ने नीतीश को दी बधाई
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''नीतीश कुमार जी देश के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं। सुशासन को लेकर उनकी प्रतिबद्धता की हर तरफ सराहना हुई है।'' उन्होंने कहा कि कुमार ने बिहार के विकास में अमिट योगदान दिया है और उन्हें एक बार फिर संसद में देखना बहुत सुखद होगा। मोदी ने कहा कि सांसद और केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उन्होंने कई वर्षों तक अपनी सेवाएं दी हैं। उन्होंने कहा, ''मुझे पूरा विश्वास है कि उनके लंबे राजनीतिक अनुभव से संसद की गरिमा और बढ़ेगी। राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने पर उन्हें हार्दिक बधाई और आगे के कार्यकाल के लिए ढेरों शुभकामनाएं।''
जानकारी हो कि भारत के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने बिहार से निर्वाचित राज्यसभा सदस्य नीतीश कुमार को आज संसद भवन में शपथ दिलाई। नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य की भूमिका संभालने के साथ ही बिहार में उनके करीब दो दशक लंबे शासन का अंत होने जा रहा है। वह जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के 14 अप्रैल को बिहार का नया मुख्यमंत्री चुनने की संभावना है। नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद 30 मार्च को राज्य विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। वह 16 मार्च को संसद के उच्च सदन के लिए निर्वाचित हुए थे और इसके बाद 14 दिन की अवधि के भीतर उन्हें विधान परिषद का सदस्य पद छोड़ना था।

