नए आपराधिक कानूनों के बाद बिहार में फॉरेंसिक जांच को मिली मजबूती, हजारों मामलों का हुआ निपटारा
Monday, Jan 19, 2026-04:19 PM (IST)
Bihar News: 01 जुलाई 2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानूनों (भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम) के बाद बिहार में आपराधिक जांच प्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। खासकर फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य किए जाने से अपराध अनुसंधान अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और सशक्त हुआ है।
नए कानूनों के तहत 07 वर्ष से अधिक सजा वाले मामलों में घटनास्थल पर विधि विज्ञान प्रयोगशाला (Forensic Science Laboratory – FSL) के अधिकारियों की मौजूदगी और साक्ष्य संकलन अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही डिजिटल साक्ष्यों को कानूनी मान्यता मिलने से साइबर और डिजिटल फॉरेंसिक की भूमिका भी काफी बढ़ गई है।
हजारों मामलों की फॉरेंसिक जांच पूरी
राज्य की विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं में 01 जुलाई 2024 से पहले 4,088 मामलों के 16,800 प्रदर्श लंबित थे। नए कानूनों के लागू होने के बाद 01 जुलाई 2024 से 31 दिसंबर 2024 के बीच 5,141 मामलों के 25,285 प्रदर्शों की जांच पूरी कर रिपोर्ट संबंधित एजेंसियों को सौंप दी गई। वहीं, वर्ष 2025 में रिकॉर्ड स्तर पर 10,955 मामलों के 56,511 प्रदर्शों की फॉरेंसिक जांच पूरी की गई है, जिससे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आई है।
घटनास्थल पर बढ़ी फॉरेंसिक टीम की मौजूदगी
नए कानूनों के लागू होने के बाद 01 जुलाई 2024 से 31 दिसंबर 2024 तक 5,482 मामलों में फॉरेंसिक अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य संकलन किया। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 10,457 मामलों तक पहुंच गई, जिससे जांच की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
राज्य में फॉरेंसिक ढांचे का विस्तार
बिहार में वर्तमान में 44 राजपत्रित अधिकारी और 85 वरीय वैज्ञानिक सहायक कार्यरत हैं। इसके अलावा 89 सहायक निदेशक और 100 वरीय वैज्ञानिक सहायकों की संविदा पर नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। राज्य में पश्चिम चंपारण (बेतिया), पूर्णियां, गया, रोहतास, सहरसा, सारण (छपरा), दरभंगा, मुंगेर और बेगूसराय में कुल 9 क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं स्वीकृत हैं। इनमें से कई जिलों में भवन निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और शेष पर तेजी से कार्य जारी है।
2026 तक छह नई क्षेत्रीय प्रयोगशालाएं होंगी क्रियाशील
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026 तक पूर्णियां, सारण, बेतिया, गया, सहरसा और मुंगेर की क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं को पूरी तरह क्रियाशील करना है। फॉरेंसिक जांच को और मजबूत करने के लिए पटना स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला में अतिरिक्त डीएनए यूनिट तथा मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर में डीएनए यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके साथ ही पटना और राजगीर में अत्याधुनिक साइबर फॉरेंसिक लैब स्थापित करने के लिए राष्ट्रीय न्यायालयिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU), गांधीनगर के साथ समझौता किया गया है, जिससे डिजिटल अपराधों की जांच और प्रभावी होगी।
हर जिले में चलंत फॉरेंसिक यूनिट
राज्य के सभी 38 जिलों में चलंत विधि विज्ञान इकाइयां स्वीकृत हैं। फिलहाल 51 चलंत फॉरेंसिक वाहन उपलब्ध हैं और 50 नए वाहनों की खरीद का प्रस्ताव भी भेजा गया है।
विशेषज्ञों को मिल रहा आधुनिक प्रशिक्षण
फॉरेंसिक विशेषज्ञों को NFSU गांधीनगर, केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं (चंडीगढ़, दिल्ली, हैदराबाद) में आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि आपराधिक जांच को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जा सके। नए आपराधिक कानूनों के साथ बिहार की फॉरेंसिक प्रणाली अब अपराधियों पर शिकंजा कसने में कहीं अधिक सक्षम और वैज्ञानिक बन रही है।

