Basant Panchami 2026 Date: 22 या 23 जनवरी? यहां दूर करें सारा कन्फ्यूजन

Monday, Jan 19, 2026-04:53 PM (IST)

Basant Panchami 2026 Date: बसंत पंचमी सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति में नई ऊर्जा, ज्ञान का प्रकाश और जीवन में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। चारों ओर पीले रंग की छटा, मन में उत्साह और दिल में नई शुरुआत की उम्मीदें—बसंत पंचमी का यही सौंदर्य इसे खास बनाता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा कर विद्या, बुद्धि और कला का आशीर्वाद लिया जाता है। हर साल की तरह इस बार भी लोगों के मन में यही सवाल है कि Basant Panchami 2026 22 जनवरी को है या 23 जनवरी को?
आइए पंचांग और उदया तिथि के आधार पर इसका स्पष्ट जवाब जानते हैं।

Basant Panchami 2026 Date: कब मनाई जाएगी सरस्वती पूजा?

Hindu Panchang 2026 के अनुसार, पंचमी तिथि का आरंभ 22 जनवरी की शाम से हो रहा है, लेकिन शास्त्रों में उदया तिथि को पर्व मानने की परंपरा है।

 बसंत पंचमी की सही तिथि

  • बसंत पंचमी / सरस्वती पूजा: 23 जनवरी 2026, शुक्रवार
  • पंचमी तिथि का समय
  • तिथि प्रारंभ: 22 जनवरी 2026, शाम 06:15 बजे
  • तिथि समाप्त: 23 जनवरी 2026, रात 08:30 बजे

चूंकि 23 जनवरी की सुबह सूर्योदय के समय पंचमी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए इसी दिन Basant Panchami 2026 और Saraswati Puja मनाई जाएगी।

Saraswati Puja 2026 Muhurat: पूजा का सबसे शुभ समय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सरस्वती की पूजा के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना जाता है।

पूजा के शुभ मुहूर्त

  • पूजा समय: सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक
  • Amrit Kaal: सुबह 08:45 से 10:20 बजे तक

इस दौरान की गई पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है।

Saraswati Puja Vidhi: ऐसे करें मां सरस्वती की पूजा

Yellow Colour Significance बसंत पंचमी का मुख्य आकर्षण है, जो ऊर्जा, ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

पूजा विधि:

सुबह स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें। चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। साथ में भगवान गणेश को भी विराजमान करें। कलश स्थापित कर धूप-दीप जलाएं। मां को पीले फूल, गेंदा, सरसों, केसर, पीला चंदन और अक्षत अर्पित करें। इस दिन किताबें, कॉपी, कलम और संगीत वाद्य यंत्र मां के चरणों में रखकर पूजा करें। बच्चों के लिए Akshar Abhyas (विद्यारंभ) शुरू करने का यह सबसे शुभ दिन माना जाता है। पीले मीठे चावल, बूंदी के लड्डू या केसरिया हलवा अर्पित करें और अंत में मां सरस्वती की आरती करें।

क्यों खास है यह दिन?

बसंत पंचमी अज्ञान से ज्ञान की ओर यात्रा का प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब सृष्टि की रचना के बाद चारों ओर नीरवता थी, तब ब्रह्मा जी के आह्वान पर मां सरस्वती प्रकट हुईं। उनके वीणा वादन से ही संसार में वाणी, संगीत और ज्ञान का प्रवाह शुरू हुआ।
इसी कारण यह दिन ज्ञान,कला,संगीत और बुद्धि को मां सरस्वती को समर्पित करने का पर्व माना जाता है।


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Ramanjot

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