Bihar Rajya Sabha Election 2026: एआईएमआईएम के 5 विधायक किंगमेकर, पार्टी ने खुद उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया!
Thursday, Feb 19, 2026-11:01 PM (IST)
पटना: बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें अप्रैल 2026 में रिक्त हो रही हैं। Election Commission of India ने इन सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित करते हुए 16 मार्च 2026 को मतदान की तारीख तय की है। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखें तो सत्ताधारी National Democratic Alliance (NDA) को चार सीटें आराम से मिलती दिख रही हैं। लेकिन पांचवीं सीट का गणित पेचीदा है और यहीं से राजनीतिक रोमांच शुरू होता है।
पांचवीं सीट पर फंसा पेंच
एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 वोटों की जरूरत है। NDA के पास कुल 202 विधायक हैं, जिससे चार सीटों का आंकड़ा सुरक्षित है। पांचवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ेगी। दूसरी ओर, महागठबंधन (RJD, कांग्रेस और अन्य सहयोगी) के पास 35 विधायक हैं। यदि उन्हें All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) के पांच और एक अन्य छोटे दल का समर्थन मिल जाए, तो वे भी 41 के आंकड़े तक पहुंच सकते हैं। यही वजह है कि AIMIM के पांच विधायक इस चुनाव में निर्णायक भूमिका में नजर आ रहे हैं।
AIMIM का रुख क्या है?
AIMIM के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि पार्टी में टूट की खबरें बेबुनियाद हैं। विधायक मुर्शीद आलम ने कहा कि उनका कोई भी साथी Nitish Kumar या उनकी पार्टी के संपर्क में नहीं है। पार्टी प्रमुख Asaduddin Owaisi पहले भी कह चुके हैं कि यदि राजनीतिक समीकरण बदलते हैं तो वे अपने स्तर पर निर्णय लेंगे।
प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने भी दावा किया कि AIMIM इस बार किसी गठबंधन को समर्थन देने के बजाय अपना उम्मीदवार उतारने पर विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है तो मुकाबला और रोचक हो सकता है।
सियासी बयानबाजी तेज
Rashtriya Janata Dal के कुछ नेताओं का मानना है कि AIMIM वैचारिक रूप से उनके करीब है। वहीं Bharatiya Janata Party के नेताओं का दावा है कि विपक्ष के कुछ विधायक सरकार के संपर्क में हैं। 2022 की स्थिति भी चर्चा में है, जब AIMIM के चार विधायक RJD में शामिल हो गए थे। इस बार पार्टी ज्यादा सतर्क और स्वतंत्र रणनीति अपनाने के संकेत दे रही है।
किस पर टिकी है नजर?
पांचवीं सीट का नतीजा छोटे दलों के रुख, क्रॉस-वोटिंग की संभावना और अंतिम समय की रणनीति पर निर्भर करेगा। फिलहाल सभी दल अपने-अपने समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं और पर्दे के पीछे बातचीत का दौर जारी है। बिहार की राजनीति में यह चुनाव नए समीकरण गढ़ सकता है।

