झारखंड में कोयला माफिया के शिकंजे में नदियां, जमुनिया-दामोदर-कतरी पर मंडरा रहा संकट
Tuesday, Apr 14, 2026-02:39 PM (IST)
Jharkhand News : झारखंड के धनबाद जिले होकर गुजरने वाली और कोयलांचल की जीवनदायिनी नदियां अब जीवनदायिनी कम और अवैध खनन के गवाह अधिक बनती जा रही हैं। जमुनिया, दामोदर और कतरी नदियों के किनारे सक्रिय कोयला माफिया ने ऐसा जाल बिछा दिया है कि इन नदियों का प्राकृतिक स्वरूप ही खतरे में पड़ गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में इन नदियों का अस्तित्व मिटने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। नदियों के किनारे बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन जारी है। कई जगहों पर भूमिगत सुरंग बनाकर कोयले की निकासी की जा रही है, जिससे नदी तट खोखले हो चुके हैं। इसका परिणाम यह है कि धंसान का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
नदियों के किनारे बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन जारी
नदियों के किनारे बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन जारी है। कई जगहों पर भूमिगत सुरंग बनाकर कोयले की निकासी की जा रही है, जिससे नदी तट खोखले हो चुके हैं। इसका परिणाम यह है कि धंसान का खतरा लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां कभी भी बड़े हादसे को जन्म दे सकती हैं, जिससे जान-माल का भारी नुकसान संभव है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा समय-समय पर अवैध खनन के मुहानों को बंद कराने की कारर्वाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। एक ओर जहां मुहानों को बंद किया जाता है, वहीं दूसरी ओर कुछ ही दिनों में नए मुहाने तैयार हो जाते हैं। इससे यह संदेह गहराता जा रहा है कि इस अवैध कारोबार को कहीं न कहीं संरक्षण प्राप्त है।
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बीसीसीएल प्रबंधन, स्थानीय पुलिस और सीआईएसएफ की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रतिदिन हजारों टन कोयले की अवैध निकासी हो रही है, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस और स्थायी कारर्वाई नहीं की जा रही। इससे तस्करों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं। अवैध कोयला कारोबार का असर अब सामाजिक और आर्थिक असंतुलन के रूप में भी सामने आ रहा है। कम समय में इस धंधे से जुड़े कई लोग आर्थिक रूप से संपन्न हो गए हैं। क्षेत्र में तेजी से बनते पक्के मकान और महंगी गाड़ियों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत देती है कि यह काला कारोबार कितनी गहराई तक फैला हुआ है। पर्यावरण विशेषज्ञों की चेतावनी है कि यदि इन नदियों के साथ हो रही छेड़छाड़ को तुरंत नहीं रोका गया, तो इसका सीधा असर जलस्तर, जैव विविधता और आसपास के गांवों की आजीविका पर पड़ेगा। नदियों का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होने से भविष्य में जल संकट की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि 'आय से अधिक संपत्ति' की जांच कर पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जाना चाहिए, ताकि इस अवैध कारोबार पर स्थायी रूप से रोक लगाई जा सके। साथ ही, नदियों को बचाने के लिए जन-आंदोलन खड़ा करने की भी जरूरत बताई जा रही है। जिले के कतरास क्षेत्र की कतरी नदी में अवैध उत्खनन और छेड़छाड़ के मामले में प्रशासन पहले ही सख्त रुख अपना चुका है। हाल ही में धनबाद के एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया था और आवश्यक कारर्वाई के निर्देश दिए थे। इस कारर्वाई से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था। समाजसेवी सह वियाडा के पूर्व अध्यक्ष विजय झा ने इस मामले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के साथ इस तरह की छेड़छाड़ बेहद गंभीर है और इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। वहीं जमशेदपुर पश्चिमी विधायक सरयू राय ने भी इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया था, जिसके बाद से राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज कर दी है।

