अर्जुन मुंडा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को लिखा पत्र, अजीत महतो की पुलिस हिरासत में मौत पर न्यायिक जांच की मांग
Tuesday, Jan 06, 2026-11:42 AM (IST)
Jharkhand News: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने जमशेदपुर के मानगो क्षेत्र में अजीत महतो की पुलिस अभिरक्षा में हुई मृत्यु को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (नई दिल्ली) को पत्र लिखकर स्वतंत्र एवं न्यायिक जांच की मांग की है।
पुलिस अभिरक्षा में मौत संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: अर्जुन मुंडा
मुंडा ने अपने पत्र में लिखा है कि जमशेदपुर अंतर्गत मानगो के गोकुल नगर बस्ती निवासी अजीत महतो की 30 दिसंबर को पुलिस हिरासत में हुई मृत्यु प्रथम द्दष्टया संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन एवं गरिमा के अधिकार तथा स्थापित मानवाधिकार मानकों का गंभीर उल्लंघन प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक है कि बिना किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच के केवल एक अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज किया गया तथा मृतक के परिजनों से सादे कागज पर जबरन हस्ताक्षर कराकर 2 लाख की राशि सौंप दी गई। इस राशि के वैधानिक आधार एवं प्रक्रिया को स्पष्ट नहीं किया गया, जिससे पूरे प्रकरण की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
अर्जुन मुंडा ने यह भी उल्लेख किया कि गिरफ्तारी के बाद लगभग दो दिनों तक मृतक के परिजनों को उससे मिलने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे यह आशंका गहराती है कि अजीत महतो की मृत्यु पुलिस यातना के कारण हुई हो सकती है। इसी दौरान मृतक की गर्भवती पत्नी ने एक नवजात कन्या को जन्म दिया। अजीत महतो अपने परिवार के एकमात्र आजीविका अर्जक थे, जिससे अब उनका परिवार गंभीर सामाजिक, आर्थिक और मानसिक संकट में फंस गया है।
पुलिसकर्मियों एवं अधिकारियों के विरुद्ध कठोर विधिक व विभागीय कारर्वाई करने की मांग
पत्र में कहा गया है कि पुलिस अभिरक्षा में किसी नागरिक की मृत्यु अपने आप में एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है, जिसकी जांच स्वतंत्र, उच्चस्तरीय एवं न्यायिक प्रकृति की होनी अनिवार्य है। श्री मुंडा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से आग्रह किया है कि इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए स्वतंत्र एवं न्यायिक जांच सुनिश्चित की जाए, दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों एवं अधिकारियों के विरुद्ध कठोर विधिक व विभागीय कारर्वाई की जाए तथा मृतक के परिजनों को न्यायोचित व सम्मानजनक मुआवजा, पुनर्वास एवं आवश्यक सुरक्षा प्रदान की जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आयोग इस गंभीर और संवेदनशील मानवाधिकार मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर न्याय सुनिश्चित करेगा।

