महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की बड़ी पहल, 8 मार्च को हेमंत सरकार लॉन्च करेगी नई योजना
Sunday, Feb 08, 2026-11:57 AM (IST)
Jharkhand News: झारखंड सरकार मंईयां सम्मान योजना से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। राज्य सरकार 50 लाख महिला लाभुकों को स्वरोजगार के लिए बैंक के माध्यम से 20-20 हजार रुपये का ऋण उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है। अगर यह प्रस्ताव सफल रहा तो इसे आगामी बजट में शामिल किया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, इस योजना को लेकर शनिवार को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में बैंकों के साथ एक अहम बैठक हुई। बैठक में सभी बैंक प्रतिनिधियों ने योजना के क्रियान्वयन में सहयोग करने पर सहमति जताई और वरीय प्रबंधन से जल्द अनुमति लेने की बात कही। फिलहाल मंईयां सम्मान योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की सहायता राशि दी जा रही है। सरकार इसी राशि को आधार बनाकर महिलाओं को छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित करना चाहती है। वित्त मंत्री ने बैंकों के सामने प्रस्ताव रखा कि ऋण की किस्त महिलाओं को मिलने वाली सम्मान राशि से ही समायोजित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस राशि को पूंजी के रूप में इस्तेमाल कर महिलाओं को उद्यमी बनाया जा सकता है।
सरकार इस योजना को औपचारिक रूप से 8 मार्च, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शुरू करने पर विचार कर रही है। इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री की भी सहमति प्राप्त है। योजना के नाम को लेकर भी मुख्यमंत्री से विमर्श किया जाएगा। ऋण की अदायगी के लिए 12 से 24 महीने की समय-सीमा तय करने का सुझाव दिया गया है। इस पर वित्त विभाग और बैंकों के प्रतिनिधि आपसी सहमति से अंतिम निर्णय लेंगे। यह भी प्रस्ताव है कि यदि कोई लाभुक समय पर ऋण चुका देती है, तो बैंक व्यवसाय का भौतिक सत्यापन कर उसकी ऋण सीमा बढ़ाकर 50 हजार रुपये तक कर सकते हैं। ऋण पर ब्याज दर केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) के मानकों के अनुरूप रखने पर विचार किया जा रहा है।
वित्त मंत्री ने बैंकों से आग्रह किया है कि ऋण प्रक्रिया को बेहद सरल रखा जाए। तय किया गया है कि केवल आधार कार्ड को अनिवार्य दस्तावेज बनाया जाए। आवेदन दस रुपये के रेवेन्यू स्टांप पर स्वीकार किया जा सकता है और सात दिनों के भीतर ऋण प्रक्रिया पूरी की जाएगी। योजना की निगरानी के लिए एक विशेष डिजिटल पोर्टल तैयार किया जाएगा। इस पोर्टल के जरिए ऋण वितरण और अदायगी की नियमित निगरानी की जाएगी। वित्त विभाग के अधिकारी बैंकों के साथ मिलकर पोर्टल की संरचना तैयार करेंगे।

