केंद्रीय बजट से आम जनता को क्या मिला? झारखंड कैबिनेट बैठक के बाद CM हेमंत सोरेन का केंद्र सरकार पर निशाना
Friday, Feb 06, 2026-11:07 AM (IST)
Ranchi News: झारखंड की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई झारखंड मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद केंद्र सरकार और केंद्रीय बजट को लेकर सीएम ने तीखा हमला बोला। उन्होंने बजट को आम जनता के लिए निराशाजनक बताया और कई सवाल खड़े किए।
"बजट में जनता को नहीं मिली राहत"
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में बीते गुरुवार को झारखंड मंत्रिपरिषद की बैठक संपन्न हुई। 5 फरवरी को हुई इस कैबिनेट बैठक में कुल 27 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने मंत्रियों के साथ मीडिया से बातचीत की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि बजट को ध्यान से देखने की जरूरत है और यह समझना होगा कि इससे आम लोगों को आखिर क्या फायदा हुआ है। सीएम ने सवाल उठाया कि चाहे कृषि क्षेत्र हो या कोई और सेक्टर, बजट में ऐसा कुछ नजर नहीं आता जिससे जनता को राहत मिली हो।
"बजट में आम लोगों की जरूरतों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया"
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इस बजट में आम लोगों की जरूरतों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि विकास की बात तब होती है जब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी आसान हो, लेकिन इस बजट में ऐसा कुछ नहीं दिखता। कोयला, खनिज और लोहा महंगे होने को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री और भी मुखर नजर आए। उन्होंने कहा कि सिर्फ खनिज संसाधनों की कीमतों पर बात करना काफी नहीं है, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि रोजमर्रा की जरूरी चीजें सस्ती हुई हैं या नहीं। सीएम ने कहा कि इस बजट में दाल और चावल जैसी जरूरी वस्तुएं भी महंगी हो गई हैं, ऐसे में इसे विकास वाला बजट कैसे कहा जा सकता है।
"असम में आज भी चाय बागान मजदूरों की स्थिति बेहद खराब है"
असम दौरे से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने वहां के चाय बागान मजदूरों की हालत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि असम में आज भी चाय बागान मजदूरों की स्थिति बेहद खराब है और वहां गुलामी जैसी हालत नजर आती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वहां ऐसा लगता है जैसे देश के अंदर ही कोई अलग देश हो, जहां आज भी अंग्रेजी शासन की छाया दिखाई देती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इन बयानों के बाद राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय बजट को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

