छापे लालू परिवार पर लेकिन जदयू में क्यों मची है खलबली, इस बार नीतीश के किसी भी पैंतरे का जवाब देने के लिए तैयार है BJP

5/21/2022 1:23:01 PM

पटना (विकास कुमार): लालू प्रसाद यादव के परिवार से जुड़े कई ठिकानों पर छापे के बाद नीतीश बाबू के खेमे में खलबली मची हुई है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि दिन में छापे के बाद शाम में नीतीश बाबू ने जेडीयू के बड़े साथियों की एक बैठक बुला ली। इस बैठक में विधायकों को किसी भी फैसले के लिए तैयार रहने का निर्देश जारी किया गया है। दरअसल बोचहां में बीजेपी की हार के बाद से नीतीश बाबू ने एनडीए गठबंधन को लेकर एक बार फिर से नया जाल बुनना शुरू कर दिया। धीरे से ही सही नीतीश बाबू ने जाति जनगणना और विशेष राज्य के दर्जे के मुद्दे को हवा देना शुरू किया। जाति जनगणना के मुद्दे पर नीतीश बाबू धीरे धीरे कर तेजस्वी के करीब चले गए। नीतीश बाबू और लालू परिवार के बीच रिश्तों पर पड़ी बर्फ के पिघलने की शुरुआत इफ्तार पार्टी से शुरू हुई। 

नीतीश बाबू की लालू परिवार से नजदीकी खुलकर आई सामने
हद तो ये हो गई कि नीतीश बाबू पैदल चल कर आरजेडी के इफ्तार पार्टी के लिए राबड़ी आवास पहुंचे। इस इफ्तार पार्टी में नीतीश बाबू और लालू परिवार के बीच एक मधुर रिश्ता बनता नजर आया और नीतीश बाबू ने भी जेडीयू की इफ्तार पार्टी में तेजस्वी और तेजप्रताप को बुलावा भेजा। इस बुलावे पर तेजस्वी और तेजप्रताप भी खुशी खुशी शामिल हुए और बड़े ही सौहार्दपूर्ण माहौल में हुए इस मिलन समारोह में नीतीश बाबू की लालू परिवार से नजदीकी खुलकर सामने आ गई। इफ्तार के खत्म होने के बाद नीतीश बाबू तेजस्वी और तेजप्रताप को बाहर तक छोड़ने आए। इफ्तार पार्टी से शुरू हुई दोनों दिग्गजों के रिश्तों में धीरे धीरे और भी गर्माहट आती गई। हाल ही में जाति जनगणना के मुद्दे पर नीतीश बाबू ने तकरीबन एक घंटे तक तेजस्वी से चर्चा की है। हालांकि बीजेपी के एक धड़े का मानना है कि इस मुलाकात में जाति जनगणना के अलावा सत्ता के नए समीकरण पर चर्चा की गई है। 

पटना के सियासी गलियारों में हो रही ये चर्चाएं 
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी के बीच सत्ता के साझेदारी पर सहमति बनने की खबर पटना के गलियारों में गूंजने लगी। हालांकि इस साझेदारी के फार्मूले के बारे में कोई साफ तस्वीर सामने नहीं आई है, लेकिन इस बारे में पटना के सियासी गलियारों में दो तरह की चर्चा हो रही है। एक तो ये है कि 2024 तक नीतीश बाबू ही मुख्यमंत्री रहेंगे और आरजेडी उनका साथ देती रहेगी। साथ ही 2024 के लोकसभा चुनाव में नीतीश बाबू तीसरे मोर्चे का नेतृत्व करते हुए प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी को चुनौती देंगे। वहीं दूसरी चर्चा ये है कि तेजस्वी के हाथ में बिहार की बागडोर होगी और नीतीश बाबू अभी से 2024 की लोकसभा चुनाव की मुहिम में जुट जाएंगे। साफ है कि ये नए रिश्ते बीजेपी के लिए मुश्किलों का अंबार खड़ा कर देती क्योंकि इससे बिहार में लोकसभा चुनाव में बीजेपी की संभावना कमजोर पड़ जाती और जेडीयू-आरजेडी गठजोड़ से लोकसभा चुनाव में तीसरे मोर्चे की स्थिति काफी मजबूत हो जाती। 

RCP के जरिए JDU के किले में ही सेंध लगाने की तैयारी
ऐसा नहीं है कि बीजेपी के आलाकमान को बिहार में पक रही सियासी खिचड़ी के बारे में जानकारी नहीं है। यही वजह है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने खुद बिहार में नीतीश बाबू के तोड़ के लिए मोहरा खोज लिया है। बताया जा रहा है कि आरसीपी सिंह के जरिए जेडीयू के किले में ही सेंध लगाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए आरसीपी सिंह को खुली छूट दी गई है। कई दिनों से आरसीपी सिंह नालंदा में ही कैंप किए हुए थे। हाल ही में इफ्तार पार्टी के जरिए आरसीपी सिंह ने अपनी ताकत जेडीयू और बीजेपी के नेताओं को दिखा दी है क्योंकि इस इफ्तार पार्टी में जेडीयू के 31 विधायकों के आने की जानकारी सामने आई है। 

बिहार में अभी सबसे बड़ी पार्टी है बीजेपी 
बताया जा रहा है कि कुछ और विधायक भी आरसीपी सिंह के संपर्क में हैं और अगर नीतीश बाबू ने बाजी को पलटने की कोशिश की तो उनकी पार्टी को आरसीपी सिंह के नेतृत्व में तोड़ा जा सकता है। वहीं दल बदल की सूरत में बीजेपी कोटे के स्पीकर विजय कुमार सिन्हा नीतीश बाबू के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। वहीं जेडीयू के भीतर किसी भी तरह के तोड़फोड़ में सारी शक्ति राज्यपाल फागू चौहान के हाथ में आ जाएगी। बिहार में अभी सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी की है। इसलिए बदली परिस्थितियों में सरकार बनाने का पहला दावा बीजेपी के खाते में जा सकता है। यानी बीजेपी इस बार नीतीश बाबू को उन्हीं की भाषा में जवाब देने की तैयारी कर चुकी है। बस इंतजार इस बात का है कि पहली चाल कौन चलता है। अगर नीतीश बाबू पहली चाल चलेंगे तो बीजेपी एक साथ सारे मोहरे सामने लाकर खड़ी कर देगी।

वहीं सीबीआई के छापे से भी ये साफ हो गया है कि अगर नीतीश बाबू ने 2024 से पहले यू टर्न मारा तो इस हथियार का उनके खिलाफ भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसी हालत में जेडीयू का एक धड़ा आरसीपी सिंह के नेतृत्व में बीजेपी का साथ देगा और नीतीश बाबू पर तमाम तरह के मुकदमे लादे जा सकते हैं। इसमें सबसे ज्यादा सृजन घोटाला की चर्चा भी की जा रही है लेकिन सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि नीतीश बाबू क्या कदम उठाते हैं। अगर वे बागी होंगे तो उन्हें बीजेपी की पूरी ताकत का सामना करना पड़ेगा। वैसे भी बीजेपी अभी इतनी मजबूत है कि किसी भी सूरत में नीतीश बाबू को बड़ा नुकसान उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए। यही वजह है कि नीतीश बाबू ने जेडीयू नेताओं की बैठक बुलाकर उन्हें हर फैसले के लिए तैयार रहने का संदेश दे दिया है।


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Ramanjot

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