70 ब्राह्मणों पर FIR दर्जः SC-ST एक्ट के दुरुपयोग पर भड़के नीतीश के मंत्री, अपनी ही सरकार को दे डाली चेतावनी
Saturday, Feb 07, 2026-06:52 PM (IST)
Bihar News : बिहार के दरभंगा जिले के कुशेश्वर स्थान में बकाया मजदूरी के विवाद ने हिंसक मोड़ ले लिया है। इस मामले में पुलिस द्वारा एक साथ 70 ब्राह्मण समुदाय के लोगों पर SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज करने के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है। राज्य के ग्रामीण कार्य विभाग मंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी (Ashok Choudhary) ने इस कानून के दुरुपयोग को लेकर अपनी ही सरकार के सिस्टम को कड़ी चेतावनी दी है।
मंत्री अशोक चौधरी की दो-टूक
स्वयं अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले अशोक चौधरी ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा: "SC/ST एक्ट या दहेज कानून जैसे कड़े प्रावधानों का अक्सर दुरुपयोग होता है। ये कानून दलितों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने थे। यदि इनका गलत इस्तेमाल हुआ, तो समाज में दलितों के प्रति सहानुभूति समाप्त हो जाएगी और सामाजिक ताना-बाना बिखर जाएगा।"
क्या है पूरा मामला?
घटना की शुरुआत हरिनगर गांव से हुई, जहां मजदूरी के भुगतान को लेकर दो पक्षों में तनाव व्याप्त था। राजमिस्त्री कैलाश पासवान का दावा है कि उसने 2015 में केरल में हेमकांत झा की बहन के घर के निर्माण में काम किया था, जिसका ₹2.47 लाख बकाया है। 29 जनवरी को जब हेमकांत की बहन गांव आईं, तो कैलाश ने उनकी कार रोककर पैसों की मांग की। हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ लेकिन अगले दिन कैलाश ने कथित तौर पर श्रीनाथ झा और हेमकांत पर हमला कर दिया।।
हिंसा का दौर और पुलिस की सामूहिक कार्रवाई
पुलिस ने इसे साधारण मारपीट मानते हुए BNS की जमानती धाराओं में मामला दर्ज किया था। विवाद ने तब उग्र रूप ले लिया जब 31 जनवरी को ब्राह्मण बस्ती के लगभग 150 लोगों ने कथित तौर पर कैलाश पासवान के घर पर धावा बोल दिया। हमले में एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए, जिनमें से 9 को DMCH में भर्ती कराना पड़ा। वहीं कुशेश्वर स्थान पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 70 लोगों के खिलाफ SC/ST एक्ट और BNS के तहत मामला दर्ज किया, जिनमें से 12 की गिरफ्तारी हो चुकी है।
जाति का रंग न दें: प्रशासन की सफाई
बिरौल SDPO प्रभाकर तिवारी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्पष्ट किया है कि पुलिस किसी जाति विशेष को निशाना नहीं बना रही है। उन्होंने कहा, "गांव में ब्राह्मणों की संख्या 2,500 से अधिक है, जबकि पासवान समुदाय के केवल 60-70 लोग हैं। हमने पूरे गांव पर नहीं, बल्कि शुरुआती जांच में दोषी पाए गए लोगों पर मामला दर्ज किया है। इसे जातिवाद से जोड़ना गलत है।"

