All India Pregnant Job Service: महिलाओं को गर्भवती करो और 10 लाख कमाओ...बिहार में जॉब के नाम पर चल रहा चौंकाने वाला खेल
Saturday, Jan 10, 2026-12:58 PM (IST)
All India Pregnant Job Service: बिहार के नवादा जिले से साइबर अपराध (Cyber Crime) का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां ठगों ने निःसंतान दंपतियों की भावनाओं और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर एक नया साइबर फ्रॉड शुरू किया, जिसे उन्होंने ‘ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब सर्विस’ का नाम दिया था। यह स्कैम सुनने में जितना अजीब लगता है, हकीकत में उतना ही खतरनाक और सामाजिक रूप से चिंताजनक है।
दस लाख कमाने का लालच देकर ठगी
पुलिस के अनुसार, आरोपी फोन कॉल के जरिए लोगों से संपर्क करते थे और दावा करते थे कि वे निःसंतान महिलाओं को गर्भवती कराने की खास तकनीक जानते हैं। ठगों का कहना होता था कि अगर कोई व्यक्ति इसकिसी निःसंतान महिला को गर्भवती कर देता है तो उसे 10 लाख रुपए तक की रकम दी जाएगी। इस लालच में आकर कई लोग रजिस्ट्रेशन फीस और अन्य चार्ज के नाम पर हजारों से लेकर लाखों रुपये तक जमा कर देते थे।
निःसंतान महिलाओं को भी बनाया शिकार
इस गिरोह की सबसे गंभीर और अमानवीय पहलू यह था कि ठग न केवल पुरुषों को बल्कि निःसंतान महिलाओं को भी अपने जाल में फंसाते थे। महिलाओं को भरोसा दिलाया जाता था कि उनकी तकनीक से गर्भधारण संभव है। इसके बदले उनसे अलग-अलग चरणों में पैसे लिए जाते थे।
मनवा गांव से खुलासा, दो आरोपी गिरफ्तार
इस पूरे साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश तब हुआ जब नवादा पुलिस को हिसुआ थाना क्षेत्र के मनवा गांव में साइबर ठगी के अड्डे की गुप्त सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक अभिनव धीमान के निर्देश पर एक विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक घर पर छापेमारी की और मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें एक नाबालिग है जबकि दूसरे की पहचान रंजन कुमार के रूप में हुई है। शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे ‘ऑल इंडिया प्रेग्नेंट जॉब’ के नाम पर लोगों से ठगी कर रहे थे और अब तक लाखों रुपये कमा चुके हैं।
चार मोबाइल जब्त, साइबर सेल जांच में जुटी
पुलिस ने आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन मोबाइलों में बड़ी संख्या में कॉल रिकॉर्ड, मैसेज और संदिग्ध चैट्स मिलने की संभावना है। साइबर सेल की टीम इन डिवाइस की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह गिरोह कब से सक्रिय था और अब तक कितने लोग इसके शिकार बने हैं।

