Census 2026: झारखंड में 1 अप्रैल से शुरू डिजिटल जनगणना, घर-घर पहुंचेंगे प्रगणक; डेटा रहेगा पूरी तरह सुरक्षित
Saturday, Feb 21, 2026-12:57 PM (IST)
Census 2026: देश में पहली बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी। सरकार ने साफ किया है कि हर नागरिक के लिए इसमें भाग लेना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। जानकारी देने से इनकार करने या गलत सूचना देने पर सजा का प्रावधान है।
दो चरणों में होगी जनगणना
जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान मकान और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े 33 सवाल पूछे जाएंगे। दूसरा चरण फरवरी 2027 से शुरू होगा। इसमें लोगों का नाम, उम्र, लिंग, धर्म और जाति जैसी व्यक्तिगत जानकारी दर्ज की जाएगी।
मोबाइल एप से घर-घर पहुंचेगा प्रगणक
हर 1000 लोगों पर एक सरकारी प्रगणक तैनात किया जाएगा। प्रगणक मोबाइल एप के जरिए घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। डेटा पहले ऑफलाइन दर्ज किया जाएगा और बाद में ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा।
प्रगणक की पहचान कैसे करें?
जनगणना का काम करने वाले सभी प्रगणक सरकारी कर्मचारी होंगे। उन्हें संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार द्वारा जारी पहचान पत्र दिया जाएगा। जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों को अतिरिक्त मानदेय भी मिलेगा।
जानकारी देना क्यों जरूरी?
जनगणना अधिनियम 1948 के तहत जनगणना में पूछे गए सवालों का जवाब देना हर नागरिक के लिए अनिवार्य है। अधिनियम की धारा 11 के अनुसार जानकारी न देने या गलत जानकारी देने पर कार्रवाई हो सकती है।
गलत सूचना देने पर सजा
अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है या जानकारी देने से इनकार करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल, एक हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है।
डेटा रहेगा सुरक्षित
सरकार के मुताबिक, नागरिकों की जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रखी जाएगी। इसके लिए बेंगलुरु, लखनऊ और नई दिल्ली में डेटा सेंटर बनाए गए हैं। डेटा तक केवल अधिकृत अधिकारियों को ही पहुंच होगी। आम लोगों को इस जानकारी का एक्सेस नहीं दिया जाएगा।

