Jharkhand Weather: शिमला बना झारखंड, माइनस 2 डिग्री तक लुढ़का मैक्लुस्कीगंज का पारा; राज्य में सर्दी ने तोड़ा रिकाॅर्ड

Saturday, Jan 10, 2026-03:41 PM (IST)

Jharkhand Weather: झारखंड इस समय कड़ाके की ठंड और शीतलहर की चपेट में है। इस बार राज्य में सर्दी ने कई वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। रांची समेत पूरे राज्य में गिरते तापमान और बर्फीली हवाओं ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। राजधानी रांची के मैक्लुस्कीगंज में न्यूनतम तापमान माइनस 2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो राज्य में इस सीजन का अब तक का सबसे कम तापमान है। इसके साथ ही यह इलाका झारखंड का सबसे ठंडा स्थान बन गया है। वहीं खूंटी जिले में न्यूनतम तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है।

कड़ाके की ठंड और शीतलहर को लेकर चेतावनी जारी
गुमला जिले में भी न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। भीषण ठंड के कारण सुबह और देर रात सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। बाजार देर से खुल रहे हैं और लोग केवल बेहद जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है, जहां लोग अलाव और गर्म कपड़ों के सहारे ठंड से बचने को मजबूर हैं। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट की आशंका बनी हुई है। वहीं खूंटी और हजारीबाग में भी न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया है। मौसम विभाग ने कड़ाके की ठंड और शीतलहर को लेकर चेतावनी जारी की है। पलामू, लातेहार, लोहरदगा, खूंटी, गढ़वा और गुमला जिलों में ऑरेंज अलटर् घोषित किया गया है, जहां शीतलहर का असर अधिक रहने की संभावना है। वहीं रांची, रामगढ़, बोकारो, पश्चिमी सिंहभूम और सिमडेगा समेत छह जिलों में येलो अलटर् जारी किया गया है।

अगले कुछ दिनों तक झारखंड में ठंड से राहत मिलने की संभावना कम
ठंड के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सरकार और जिला प्रशासन ने कई जिलों में अस्थायी आश्रय गृह तैयार किए हैं। इन आश्रय स्थलों में जरूरतमंदों के लिए ठहरने की सुविधा के साथ कंबल, चादर और तकिए मुफ्त में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। रांची और बोकारो जैसे शहरों में प्रशासनिक अधिकारी रात के समय सड़कों पर उतरकर गरीबों और बेघर लोगों के बीच कंबल वितरण करते नजर आ रहे हैं। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक झारखंड में ठंड से राहत मिलने की संभावना कम है। फिलहाल राज्य में सर्दी केवल मौसम की मार नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।


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Khushi

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