Dhanbad के हीरो: गोपाल भट्टाचार्य और उनका 30 साल का रक्तदान मिशन, बचा रहे हैं कई जिंदगियां
Thursday, Jan 22, 2026-06:42 PM (IST)
Jharkhand News: झारखंड के धनबाद से समाज सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है। यहां के रहने वाले गोपाल भट्टाचार्य पिछले तीन दशकों से लगातार लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वर्ष 1991 से शुरू हुई उनकी यह सेवा आज एक आंदोलन का रूप ले चुकी है। अब तक वह करीब 93 बार रक्तदान कर चुके हैं, जिस वजह से लोग उन्हें प्यार से ‘रक्तदानवीर’ कहते हैं।
"रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित"
गोपाल भट्टाचार्य बताते हैं कि उन्हें रक्तदान की प्रेरणा अपने परिवार से मिली। परिवार के कई सदस्य पहले से ही रक्तदान करते थे, जिससे बचपन से ही उनके मन में समाज सेवा की भावना पैदा हुई। इसी सोच के साथ उन्होंने 1991 से नियमित रूप से रक्तदान करना शुरू किया, जो आज भी जारी है। उनका कहना है कि रक्तदान को लेकर लोगों के मन में कई तरह के डर और भ्रम होते हैं, जबकि हकीकत यह है कि रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है। सही नियमों और जांच के साथ किया गया रक्तदान न तो डोनर के लिए खतरनाक है और न ही मरीज के लिए।
"नियमित रक्तदान से शरीर में आयरन का संतुलन बना रहता है"
गोपाल भट्टाचार्य के अनुसार, जो व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ हो, किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित न हो, जिसका वजन 45 से 65 किलो के बीच हो, उम्र 18 से 35 वर्ष (कई जगह 18 से 60 वर्ष तक मान्य) हो और हीमोग्लोबिन 12.5 ग्राम प्रति डीएल से अधिक हो, वह रक्तदान कर सकता है। उन्होंने बताया कि रक्तदान से सिर्फ मरीज को ही फायदा नहीं होता, बल्कि डोनर को भी कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। नियमित रक्तदान से शरीर में आयरन का संतुलन बना रहता है, लिवर बेहतर काम करता है, ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है और हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और शरीर-मन दोनों तरोताजा महसूस करते हैं।
"रक्तदान के बाद ज्यादा परहेज की जरूरत नहीं होती"
गोपाल भट्टाचार्य कहते हैं कि खून की जरूरत किसी को भी, कभी भी पड़ सकती है। सड़क हादसा, ऑपरेशन, प्रसव या गंभीर बीमारी के समय तुरंत रक्त की आवश्यकता होती है। ऐसे में सही ब्लड ग्रुप का डोनर ढूंढना मुश्किल हो जाता है। कई बार जांच में लगने वाले समय के कारण मरीज की जान भी चली जाती है। इसी वजह से वह संगठित रक्तदान शिविरों पर जोर देते हैं। अब तक वह करीब 200 से अधिक रक्तदान और ब्लड जांच शिविरों के आयोजन में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। शिविरों में लिए गए रक्त की पूरी जांच होती है और रिपोर्ट क्लियर होने के बाद ही मरीजों को रक्त दिया जाता है, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित होती है। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी में सीधे डोनर से लिया गया रक्त पूरी तरह जांचा नहीं जा पाता, जिससे जोखिम बना रहता है। इसलिए हमेशा ब्लड बैंक या रक्तदान शिविर से लिया गया रक्त ही सबसे सुरक्षित होता है। गोपाल भट्टाचार्य के अनुसार पुरुष 90 दिनों में एक बार और महिलाएं 120 दिनों में एक बार रक्तदान कर सकती हैं। रक्तदान के बाद ज्यादा परहेज की जरूरत नहीं होती, बस पर्याप्त पानी पीना चाहिए और उस दिन भारी काम से बचना चाहिए।
युवाओं से अपील:
अंत में गोपाल भट्टाचार्य ने युवाओं से आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि रक्त किसी फैक्ट्री में नहीं बनता, यह सिर्फ इंसान के शरीर में होता है। अगर युवा आगे नहीं आएंगे तो भविष्य में खून की भारी कमी हो सकती है। रक्तदान करके आप किसी जरूरतमंद के लिए जीवनदूत बन सकते हैं।

