Silver Price Today: तेज गिरावट के बाद संभली चांदी, आखिर क्यों टूटे थे सिल्वर के दाम?
Friday, Jan 02, 2026-11:24 AM (IST)
Silver Price Today: साल 2026 के पहले ही हफ्ते में चांदी की कीमतों ने तेज उतार-चढ़ाव दिखाकर निवेशकों को चौंका दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 2 जनवरी को चांदी का स्पॉट रेट 72.58 डॉलर प्रति औंस दर्ज किया गया, जिसमें एक ही दिन में करीब 2.22% की मजबूती देखने को मिली। हालांकि साप्ताहिक आधार पर चांदी अब भी 8% से ज्यादा कमजोर बनी हुई है।
घरेलू वायदा बाजार की बात करें तो MCX पर 999 शुद्धता वाली चांदी का फ्यूचर्स भाव 2,40,349 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया। यह पिछले बंद भाव से करीब 1.9% ऊपर है, लेकिन दिसंबर के आखिर में बने 2,54,174 रुपये प्रति किलो के ऑल-टाइम हाई से अभी भी करीब 5% नीचे कारोबार कर रही है।
चांदी में अचानक गिरावट की बड़ी वजह क्या रही?
बुलियन मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दिसंबर के अंतिम दिनों में चांदी ने जबरदस्त रैली दिखाई थी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाव 84 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था। लेकिन इसके बाद महज दो दिनों में कीमतों में 15% से ज्यादा की तेज गिरावट आ गई।
- इस गिरावट की सबसे अहम वजह CME Group द्वारा मार्जिन में बढ़ोतरी रही।
- 26 दिसंबर 2025 को मार्च 2026 सिल्वर फ्यूचर्स का शुरुआती मार्जिन बढ़ाया गया
- 30 दिसंबर को इसे और सख्त करते हुए करीब 30% तक बढ़ा दिया गया
- मार्जिन बढ़ते ही कई बड़े ट्रेडर्स पोजिशन संभाल नहीं पाए और न्यूयॉर्क ट्रेडिंग खुलते ही फोर्स्ड सेलिंग शुरू हो गई, जिससे चांदी पर भारी दबाव बन गया।
बिहार के प्रमुख शहरों में आज चांदी के ताजा रेट
अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव का असर बिहार के सर्राफा बाजारों में भी साफ दिखा। स्थानीय टैक्स और ज्वेलर मार्जिन के कारण मामूली अंतर के साथ रेट इस प्रकार रहे —
- पटना: ₹2,30,500 प्रति किलो
- गया: ₹2,29,800 प्रति किलो
- भागलपुर: ₹2,30,200 प्रति किलो
- मुजफ्फरपुर: ₹2,29,900 प्रति किलो
- दरभंगा: ₹2,30,000 प्रति किलो
(999 शुद्धता, अनुमानित खुदरा भाव)
आगे क्या सीमित दायरे में रहेगी चांदी?
मार्केट रिपोर्ट्स के मुताबिक, हालिया तेज उछाल और फिर आई बिकवाली के बाद अब चांदी कुछ समय के लिए कंसोलिडेशन मोड में जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाव 70 से 76 डॉलर प्रति औंस के बीच घूम सकता है।
भारतीय बाजार में इसका असर ₹2.23 लाख से ₹2.42 लाख प्रति किलो के दायरे में देखा जा सकता है। यानी शॉर्ट टर्म में किसी बड़े ब्रेकआउट की बजाय सीमित उतार-चढ़ाव की संभावना ज्यादा है।

