मकर संक्रांति पर पिघली सियासी बर्फ! अचानक राबड़ी आवास पहुंचे तेज प्रताप, लालू यादव और तेजस्वी से भी मिले
Wednesday, Jan 14, 2026-05:41 AM (IST)
पटना: मकर संक्रांति के मौके पर बिहार की राजनीति में एक भावनात्मक और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। लंबे समय से राजनीतिक और पारिवारिक दूरी झेल रहे लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव एक बार फिर 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी आवास पहुंचे। यह मुलाकात इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि पार्टी से अलग होने के बाद यह तेजस्वी और तेजप्रताप यादव की पहली आमने-सामने की भेंट थी।
भाई-भाई की मुलाकात, भतीजी कात्यायनी पर लुटाया प्यार
मंगलवार को सामने आई तस्वीरों में तेजप्रताप यादव अपने पिता लालू यादव और मां राबड़ी देवी से आशीर्वाद लेते नजर आए। सबसे भावुक पल तब दिखा जब उन्होंने अपने छोटे भाई और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से गर्मजोशी से मुलाकात की। इतना ही नहीं, तेजप्रताप ने तेजस्वी की बेटी कात्यायनी को गोद में लेकर दुलार किया, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।

‘ऐतिहासिक दही-चूड़ा भोज’ का न्योता, सियासी संदेश भी?
तेजप्रताप यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा करते हुए बताया कि उन्होंने 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होने वाले “ऐतिहासिक दही-चूड़ा भोज” के लिए पूरे परिवार को निमंत्रण दिया है। उन्होंने लिखा कि यह मुलाकात उनके लिए भावनात्मक रही और परिवार से मिले आशीर्वाद को उन्होंने जीवन का अनमोल क्षण बताया।
मंत्रियों और विपक्षी नेताओं को भी बुलावा
तेजप्रताप यादव का दही-चूड़ा भोज केवल पारिवारिक आयोजन नहीं है। उन्होंने बिहार सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों और नेताओं को भी व्यक्तिगत रूप से निमंत्रण दिया है। इनमें डिप्टी सीएम विजय सिन्हा, अशोक चौधरी, रामकृपाल यादव, दिलीप जायसवाल, रमा निषाद समेत कई नाम शामिल हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे भविष्य की रणनीति और नए समीकरणों की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
चुनावी हार और पारिवारिक संकट के बाद बदली तस्वीर

गौरतलब है कि तेजप्रताप यादव ने आरजेडी से अलग होकर जनशक्ति जनता दल का गठन किया था और 2025 विधानसभा चुनाव में महुआ सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। वहीं आरजेडी भी उस चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई।
इसी बीच लैंड फॉर जॉब केस जैसे मामलों ने भी लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। ऐसे में मकर संक्रांति पर दिखी यह एकजुटता सिर्फ पारिवारिक नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत भी मानी जा रही है।
क्या लालू परिवार में हो रही है बड़ी सुलह?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दही-चूड़ा भोज के बहाने रिश्तों की खटास कम करने और भविष्य की राजनीति को नई दिशा देने की कोशिश हो रही है। यह मुलाकात आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकती है।

