Bihar politics: रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी को दी आत्ममंथन की सलाह, समर्थन में उतरे जीतन राम मांझी
Saturday, Jan 17, 2026-09:01 PM (IST)
Bihar politics: आरजेडी सुप्रीमो Lalu Prasad Yadav की बेटी Rohini Acharya द्वारा दिए गए बयान ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। रोहिणी आचार्य ने बिना नाम लिए Tejashwi Yadav को आत्ममंथन और जिम्मेदारी लेने की नसीहत दी थी। अब इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री Jitan Ram Manjhi ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है।
शनिवार (17 जनवरी 2026) को गया में मीडिया से बात करते हुए जीतन राम मांझी ने कहा कि रोहिणी आचार्य की बात बिल्कुल सही है। उन्होंने कहा कि जिस बेटी ने अपने पिता की जान बचाने के लिए किडनी तक दान कर दी, उसी के साथ परिवार ने दुर्व्यवहार किया और उसे घर से बाहर कर दिया गया।
“परिवार का भला चाहती है रोहिणी” – मांझी
मांझी ने कहा कि रोहिणी आचार्य अपने परिवार और पार्टी का भला चाहती हैं, इसलिए उन्होंने सच्चाई सामने रखी है।उन्होंने कहा कि अब यह Lalu Yadav family पर निर्भर करता है कि वे इस सलाह को कितनी गंभीरता से लेते हैं। केंद्रीय मंत्री ने यह भी आशंका जताई कि रोहिणी की बातों को शायद नजरअंदाज कर दिया जाएगा और पार्टी में वही लोग हावी रहेंगे, जिनकी वजह से चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ा।
“जयचंदों के घेरे में फंसी पार्टी” – बड़ा आरोप
मांझी ने कहा कि रोहिणी आचार्य का यह कहना बिल्कुल सही है कि कुछ चिह्नित लोग पार्टी को भीतर से कमजोर कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की वजह से पार्टी का सर्वनाश हुआ और यही कारण रहा कि चुनाव में आरजेडी को करारी हार का सामना करना पड़ा। मांझी के मुताबिक, केवल समीक्षा नहीं बल्कि Self Introspection in Politics ही पार्टी को बचा सकता है।
तेज प्रताप यादव की राजनीति पर मांझी का बयान
तेज प्रताप यादव के Dahi-Chura Bhoj में लालू यादव के शामिल होने पर भी मांझी ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि तेज प्रताप यादव में अब गंभीरता दिखाई दे रही है, उनमें आगे की सोच है और लोगों से जुड़ने की क्षमता है। मांझी ने कहा कि तेज प्रताप ने यह साबित कर दिया कि वे सक्रिय राजनीति के लिए पूरी तरह सक्षम हैं और उनके कहने पर बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में पहुंचे।
क्या लिखा था रोहिणी आचार्य ने X पर?
रोहिणी आचार्य ने 16 जनवरी 2026 को अपने X Post में लिखा था कि केवल समीक्षा का दिखावा करने से कुछ नहीं होगा। उन्होंने कहा था कि पहले खुद आत्ममंथन करना होगा और पार्टी के आसपास मंडरा रहे “गिद्धों” को हटाने का साहस दिखाना होगा, तभी किसी समीक्षा का कोई मतलब रह जाएगा।

