खाड़ी देशों में जारी युद्ध के बीच भारतीय युवक की दुबई में मौत, शव देखने को तरस रहे परिजन

Wednesday, Mar 04, 2026-09:52 AM (IST)

Iran Israel war: खाड़ी देशों में जारी तनाव और युद्ध की आग अब बिहार के आंगन तक पहुंच गई है। युद्ध के बीच वैशाली प्रखंड अंतर्गत महम्मदपुर पंचायत के खजबत्ता गांव के एक युवक, अर्जुन कुमार की दुबई में मौत हो गई है। महज तीन महीने पहले सुनहरे भविष्य का सपना लेकर विदेश गए अर्जुन की मौत की खबर ने पूरे इलाके में मातम पसरा दिया है। 

युद्ध के बीच गई जान, अंतिम बार पत्नी से हुई थी बात 

परिजनों के अनुसार, अर्जुन कुमार (पिता: सुरेंद्र महतो) दुबई की 'गैसफार' नामक कंपनी में रिगर के पद पर कार्यरत थे। बताया जा रहा है कि शनिवार, 28 फरवरी को अर्जुन ने अपनी पत्नी से आखिरी बार फोन पर बात की थी। इसके बाद से ही उनका संपर्क टूट गया। सोमवार रात परिजनों को आधिकारिक तौर पर उनकी मौत की सूचना मिली। आशंका जताई जा रही है कि युद्ध के दौरान दुबई में हुए एक हमले में अर्जुन इसकी चपेट में आ गए। 

शव देखने को तरस रहे परिजन, कंपनी ने सुरक्षा का दिया हवाला 

अर्जुन की मौत के बाद उनके परिजन गहरे सदमे में हैं। दुबई में मौजूद उनके कुछ रिश्तेदारों ने जब शव देखने की कोशिश की, तो कंपनी प्रबंधन ने सुरक्षा कारणों और 'पुलिस क्लियरेंस' न होने का हवाला देकर फिलहाल मना कर दिया है। परिजनों को अभी यह भी जानकारी नहीं दी गई है कि अर्जुन का पार्थिव शरीर कहां रखा गया है, जिससे उनकी बेचैनी और बढ़ गई है। 

रिश्तेदार भी फंसे, संपर्क टूटा 

यह त्रासदी केवल अर्जुन तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार, अर्जुन के साले रंजन कुमार (निवासी महमदा, मुजफ्फरपुर) और उनके बहनोई अजय महतो (निवासी चांदपकड़ी) भी उसी साइट पर काम कर रहे थे। फिलहाल उन दोनों से भी परिजनों का कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिससे परिवार की चिंताएं दोहरी हो गई हैं। 

तीन महीने पहले ही गए थे दुबई 

अर्जुन दिसंबर 2025 में एक एजेंट के माध्यम से दो साल के अनुबंध (Contract) पर दुबई गए थे। उन्हें उम्मीद थी कि वहां की कमाई से परिवार की माली हालत सुधरेगी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अब शोकाकुल परिवार सरकार और प्रशासन से गुहार लगा रहा है कि अर्जुन के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द वतन वापस लाया जाए और फंसे हुए अन्य सदस्यों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए।


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Ramanjot

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