बिहार के इस कद्दावर नेता और पूर्व विधायक का निधन, राजनीतिक जगत में शोक की लहर

Tuesday, Mar 10, 2026-01:39 PM (IST)

Satish Kumar passes away: बिहार की राजनीति के एक अनुभवी स्तंभ और संघर्षशील व्यक्तित्व के धनी, पूर्व विधायक सतीश कुमार का निधन हो गया है। वे पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। उनके जाने से नालंदा और शेखपुरा सहित पूरे राजनीतिक हलके में शोक की लहर दौड़ गई है। सतीश बाबू न केवल एक कुशल राजनेता थे, बल्कि उन्हें क्षेत्र के दबे-कुचले वर्गों की आवाज बुलंद करने वाले एक प्रखर सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी जाना जाता था। 

जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले ब्रेन हैमरेज होने के कारण उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई थी। उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना के फोर्ड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद, 78 वर्षीय सतीश कुमार ने सोमवार को अंतिम सांस ली। 1948 में जन्मे सतीश बाबू अपने पीछे एक समृद्ध राजनीतिक विरासत छोड़ गए हैं। 

एक नजर राजनीतिक सफर पर 

सतीश कुमार का राजनीतिक जीवन कड़े संघर्षों की उपज था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कद्दावर नेता राजो सिंह के खिलाफ चुनाव लड़कर की थी। 1990 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के टिकट पर सूर्यगढ़ा विधानसभा से पहली बार विधायक निर्वाचित हुए। 1995 में उन्होंने अस्थावां विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। 2001 में वे समता पार्टी के टिकट पर पुनः विधायक चुने गए। 2009 में उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के बैनर तले नालंदा से लोकसभा चुनाव लड़ा, जिसमें वे दूसरे स्थान पर रहे थे। 

नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि 

उनके निधन की खबर मिलते ही समर्थकों और विभिन्न दलों के नेताओं का तांता लग गया। अस्थावां विधायक डॉ. जितेंद्र कुमार ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, "सतीश बाबू मेरे लिए अभिभावक के समान थे। उनके निधन से समाज ने एक सच्चा हितैषी खो दिया है।" ।
 


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Ramanjot

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