दीपावली से पहले स्कूली छात्रों को तोहफा, बैंक खातों में जल्द आएगी ड्रेस और जूता-मोजा की राशि
Friday, Oct 23, 2026-11:55 AM (IST)
रांची: झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू होने के पांच महीने बाद भी पोशाक, स्वेटर और जूता-मोजा के लिए मिलने वाली राशि का इंतजार है। दुर्गा पूजा बीत चुकी है और अब दीपावली व छठ का त्योहार नजदीक है। ऐसे में बच्चों और अभिभावकों को उम्मीद है कि त्योहारों के दौरान उन्हें सरकार की ओर से निर्धारित राशि मिल जाएगी।
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने दीपावली के अंत तक सभी पात्र बच्चों के बैंक खातों में राशि भेजने का लक्ष्य रखा है। परिषद के निदेशक शशि रंजन ने बताया कि केंद्र सरकार से राशि का आवंटन हो चुका है। इसके बाद भुगतान और सामग्री वितरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। कई जिलों में बच्चों को इसका लाभ मिलना शुरू हो गया है, जबकि कुछ विद्यालयों में सामग्री का वितरण भी किया जा चुका है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पोशाक, स्वेटर और जूता-मोजा उपलब्ध कराने के लिए कक्षा के अनुसार राशि निर्धारित की गई है।
विद्यार्थी अब भी इंतजार में
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कक्षा एक से पांचवीं तक के विद्यार्थियों को प्रति छात्र 600 रुपए दिए जाने का प्रावधान है। इसमें दो सेट पोशाक के लिए 350 रुपए, स्वेटर के लिए 150 रुपए और जूता-मोजा के लिए 100 रुपए शामिल हैं। वहीं, कक्षा छह से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए 700 से 760 रुपए तक का प्रावधान है। कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को पोशाक सहित निर्धारित सामग्री के लिए 1,200 रुपए देने की व्यवस्था है। राज्य के कुछ विद्यालयों में बच्चों को राशि या सामग्री मिल चुकी है, जबकि कई जगहों पर विद्यार्थी अब भी इंतजार कर रहे हैं। कक्षा एक और दो के जिन बच्चों के बैंक खाते नहीं हैं, उनके लिए स्कूल प्रबंधन समितियों या स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सामग्री खरीदकर वितरण करने की व्यवस्था है। अन्य पात्र विद्यार्थियों को डीबीटी के माध्यम से राशि भेजी जाती है या निर्धारित प्रक्रिया के तहत सामग्री उपलब्ध कराई जाती है।
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बैंक खातों और विद्यार्थियों के विवरण के सत्यापन में गड़बड़ी होने से भुगतान में देरी हो सकती है। ऐसे में लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करना जरूरी है। ठंड का मौसम नजदीक आने के कारण बच्चों को गर्म कपड़े उपलब्ध कराना जरूरी हो गया है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए पोशाक, स्वेटर और जूता-मोजा खरीदना अतिरिक्त खर्च का कारण बनता है। कुछ जिलों में खरीद के लिए स्वयं सहायता समूहों और जेम पोटर्ल के माध्यम से प्रक्रिया अपनाई जा रही है। अब विभाग के सामने दीपावली तक भुगतान का लक्ष्य पूरा करने और लंबित मामलों में तेजी लाने की चुनौती है। जिलावार प्रगति की समीक्षा और बैंक खातों से जुड़ी समस्याओं का समाधान कर ही सभी पात्र बच्चों तक समय पर सहायता पहुंचाई जा सकती है।

