क्या फ्रूट जूस पीने से बढ़ता है Diabetes का खतरा? जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ
Monday, Apr 13, 2026-01:20 PM (IST)
नेशनल डेस्क: स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने वाले लोग अक्सर अपने दिन की शुरुआत एक गिलास ताजे फलों के रस (फ्रूट जूस) से करते हैं। लेकिन हाल के दिनों में इंटरनेट और सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या फ्रूट जूस वास्तव में सेहतमंद है या यह डायबिटीज का कारण बन रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका जवाब 'हां' या 'ना' में देने के बजाय इसके पीछे के विज्ञान और सेवन के तरीके को समझना अधिक महत्वपूर्ण है।
पोषक तत्व बनाम ब्लड शुगर का प्रबंधन
BDR फार्मास्यूटिकल्स के टेक्निकल डायरेक्टर डॉ. अरविंद बडिगेर के अनुसार, फ्रूट जूस विटामिन और खनिजों का एक बेहतरीन स्रोत है, जो अच्छी सेहत के लिए जरूरी हैं। हालांकि, जब बात ब्लड शुगर (रक्त शर्करा) नियंत्रण की आती है, तो स्थिति थोड़ी बदल जाती है। डॉ. बडिगेर बताते हैं कि जूस पीना सीधे तौर पर हानिकारक नहीं है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे 'कितनी मात्रा' में और 'कब' पी रहे हैं।
साबुत फल और जूस में बड़ा अंतर
रिसर्च के अनुसार, साबुत फल और उसके रस के बीच सबसे बड़ा अंतर फाइबर (Fiber) का होता है।
साबुत फल: इसमें मौजूद फाइबर शुगर के अवशोषण (Absorption) की प्रक्रिया को धीमा कर देता है, जिससे ब्लड शुगर धीरे-धीरे बढ़ता है।
फ्रूट जूस: जूस निकालने की प्रक्रिया में फाइबर पूरी तरह हट जाता है। बिना फाइबर के, फलों की प्राकृतिक शुगर (फ्रक्टोज और ग्लूकोज) सीधे खून में पहुंच जाती है, जिससे इंसुलिन का स्तर तेजी से बढ़ सकता है।
ग्लाइसेमिक इंडेक्स और शरीर पर प्रभाव
अध्ययनों से पता चलता है कि फ्रूट जूस का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) मध्यम से उच्च स्तर का होता है। इसका मतलब है कि यह शरीर में जल्दी पचता है और ग्लूकोज के स्तर को तुरंत बढ़ाता है। चूंकि एक गिलास जूस बनाने में कई फलों का उपयोग होता है, इसलिए हम अनजाने में बहुत अधिक मात्रा में नैचुरल शुगर का सेवन कर लेते हैं।
क्या वाकई होता है डायबिटीज?
कई मेटा-एनालिसिस और वैज्ञानिक शोधों में यह पाया गया है कि सीमित मात्रा में फ्रूट जूस पीने से सीधे तौर पर डायबिटीज नहीं होती। समस्या जूस में नहीं, बल्कि इसके अत्यधिक सेवन और गलत तरीके में है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि डायबिटीज या प्रीडायबिटीज से जूझ रहे लोगों को जूस के बजाय साबुत फलों को प्राथमिकता देनी चाहिए। यदि जूस पीना ही है, तो इसकी मात्रा कम रखें और इसे भोजन के साथ लेने के बजाय सक्रिय समय के दौरान लें।

