पटना में अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रक्रिया पर उच्चस्तरीय प्रशिक्षण सत्र, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की अध्यक्षता
Thursday, Jan 15, 2026-05:54 PM (IST)
Bihar News: बिहार सरकार द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, विधिसम्मत और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आज पुराना सचिवालय, पटना स्थित सभागार में एक उच्चस्तरीय संक्षिप्त प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की, जबकि सह-अध्यक्षता महानिदेशक सह मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने की।
वरिष्ठ अधिकारियों की रही व्यापक भागीदारी
इस प्रशिक्षण सत्र में विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, राजस्व परिषद की अध्यक्ष सह सदस्य हरजोत कौर बम्हरा, अपर मुख्य सचिव (सामान्य प्रशासन विभाग) डॉ. बी. राजेंदर, अपर मुख्य सचिव (गृह विभाग) अरविंद कुमार चौधरी सहित राज्य सरकार के कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
मास्टर सर्कुलर और संदर्भ पुस्तक की जानकारी
बैठक को संबोधित करते हुए महानिदेशक सह मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी सभी परिपत्रों को संकलित कर अनुशासनात्मक कार्रवाई पर मास्टर सर्कुलर जारी किया गया है। इसके साथ ही संविधान के अनुच्छेद 311, उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों को सम्मिलित करते हुए एक संदर्भ पुस्तक भी तैयार की गई है, जिससे अधिकारियों को अनुशासनात्मक मामलों में सही प्रक्रिया अपनाने में सहायता मिलेगी।
जांच प्रक्रिया में होने वाली सामान्य त्रुटियों पर चर्चा
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जांच की शुरुआत में सही शब्दावली और विधिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। अधिकारियों को बताया गया कि बिना आरोप-पत्र के सीधे लघु दंड देना, प्रतिरक्षा कथन पर अनुशासनिक प्राधिकारी से राय मांगना, दंड, निलंबन भत्ता और निलंबन अवधि से जुड़े आदेश एक ही संकल्प में जारी करना जैसी त्रुटियों से बचना आवश्यक है।
BPSC से परामर्श अनिवार्य
यह भी स्पष्ट किया गया कि स्तर-9 एवं उससे ऊपर के पदाधिकारियों के मामलों में दंडादेश जारी करने से पूर्व बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) से परामर्श लेना अनिवार्य है। बैठक में आरोप-पत्र के विधिवत गठन, सरकारी सेवक के प्रतिरक्षा कथन के निष्पक्ष परीक्षण तथा निलंबन अवधि के समयबद्ध नियमितीकरण को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया। अधिकारियों को सचेत किया गया कि निलंबन के नियमितीकरण में विलंब होने से दंड असंगत हो सकता है और उसका उद्देश्य प्रभावित होता है।
राज्य में पारदर्शी और न्यायोचित प्रशासन का लक्ष्य
इस उच्चस्तरीय प्रशिक्षण सत्र का उद्देश्य राज्य में अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया को न्यायोचित, पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत बनाना तथा भविष्य में प्रक्रियागत त्रुटियों से बचाव सुनिश्चित करना रहा।

