मुजफ्फरपुर चोरनिया कांड: बिना तैयारी छापेमारी पड़ी भारी, SSP ने 6 पुलिसकर्मियों को किया निलंबित
Sunday, Mar 29, 2026-05:23 PM (IST)
Bihar News: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के चोरनिया गांव में पुलिस छापेमारी के दौरान हुई हिंसक घटना के बाद बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया गया है। पुलिस की जांच में लापरवाही सामने आने पर कई पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है, जिससे पूरे विभाग में हलचल मच गई है।
लोगों ने शोर मचाकर भीड़ इकट्ठा कर ली
जिले के गायघाट थाना क्षेत्र के चोरनिया गांव में 17-18 मार्च की रात पुलिस एक आरोपी को पकड़ने गई थी। यह आरोपी पॉक्सो एक्ट के मामले में फरार था।छापेमारी के दौरान गांव में अचानक माहौल बिगड़ गया। आरोप है कि जैसे ही पुलिस पहुंची, लोगों ने शोर मचाकर भीड़ इकट्ठा कर ली। इसके बाद भीड़ ने पुलिस टीम पर पत्थर, लाठी-डंडों और गोलीबारी से हमला कर दिया।
फायरिंग आत्मरक्षा में की गई
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को वहां से निकलने में काफी परेशानी हुई। उस समय के थानाध्यक्ष राजा सिंह को हवाई फायरिंग करनी पड़ी, तब जाकर टीम किसी तरह बाहर निकल पाई। इस घटना में एक ग्रामीण, जगतवीर राय, की गोली लगने से मौत हो गई। इसके बाद मामला और गंभीर हो गया। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने सीधे गोली चलाई, जबकि पुलिस का कहना है कि फायरिंग आत्मरक्षा में की गई थी।
छह पुलिसकर्मी निलंबित
मामले की जांच के लिए एफएसएल टीम को बुलाया गया और सबूत जुटाए गए। साथ ही एक विशेष टीम बनाकर जांच शुरू की गई, जो मजिस्ट्रेट की निगरानी में हो रही है। जांच में पता चला कि पुलिस ने संवेदनशील इलाके में बिना पर्याप्त बल के छापेमारी की। साथ ही पहले से संभावित खतरे के बावजूद जरूरी सावधानी नहीं बरती गई।
इन्हीं लापरवाहियों के आधार पर एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने तत्कालीन थानाध्यक्ष राजा सिंह समेत कुल छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। इसके अलावा दो गृह रक्षकों के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इस घटना के बाद मामला राजनीतिक रूप भी ले चुका है। पप्पू यादव और तेजस्वी यादव ने मृतक के परिवार से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई और क्या आगे ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा।

