बिहार: जदयू संगठन चुनाव में बड़ा फैसला, उमेश सिंह कुशवाहा निर्विरोध चुने गए प्रदेश अध्यक्ष
Friday, Mar 06, 2026-09:37 PM (IST)
Bihar News: पटना में जनता दल-यूनाइटेड के संगठनात्मक चुनाव के दौरान बड़ा फैसला सामने आया है। वैशाली जिले के महनार विधानसभा क्षेत्र से विधायक Umesh Singh Kushwaha को एक बार फिर पार्टी की बिहार इकाई का प्रदेश अध्यक्ष चुन लिया गया है। खास बात यह रही कि इस पद के लिए किसी अन्य नेता ने नामांकन दाखिल नहीं किया, जिसके कारण उनका चयन निर्विरोध हो गया।
नामांकन प्रक्रिया शुक्रवार को पूरी हुई, जहां चुनाव अधिकारी Ashok Kumar 'Munna' और Paramhans Kumar की मौजूदगी में औपचारिकताएं पूरी कराई गईं। इसके बाद शाम करीब चार बजे उनके निर्विरोध चुने जाने की आधिकारिक घोषणा कर दी गई।
यह लगातार तीसरी बार है जब कुशवाहा को पार्टी की बिहार इकाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पिछले करीब पांच वर्षों से वे संगठन की कमान संभाल रहे हैं और उन्हें मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेहद भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता है।
नामांकन के दौरान पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। प्रस्तावकों में मंत्री Leshi Singh, पूर्व मंत्री Ratnesh Sada, Sheela Mandal और Poonam Sinha शामिल थे। इसके अलावा राज्य मंत्री Ramnath Thakur, मंत्री Shravan Kumar और विधान परिषद के मुख्य सचेतक Sanjay Kumar Singh समेत कई वरिष्ठ नेता इस मौके पर उपस्थित रहे। पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण और सर्वसम्मति के माहौल में संपन्न हुई।
राजनीतिक सफर की बात करें तो उमेश सिंह कुशवाहा को पहली बार वर्ष 2021 में जदयू के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी, जब उन्होंने वरिष्ठ नेता वशिष्ठ नारायण सिंह की जगह संभाली थी। इसके बाद 2022 में उन्हें दोबारा इस पद पर चुना गया और अब 2026 में वे तीसरी बार अध्यक्ष बने हैं। वे महनार सीट से 2015 और 2025 में विधायक चुने जा चुके हैं। हालांकि 2020 के चुनाव में हार के बावजूद पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा बनाए रखा और संगठन की जिम्मेदारी दी।
सामाजिक समीकरण के लिहाज से भी कुशवाहा को पार्टी में अहम माना जाता है। वे कोइरी समुदाय से आते हैं और बिहार की राजनीति में प्रभावी माने जाने वाले ‘लव-कुश’ समीकरण में ‘कुश’ पक्ष को मजबूत करने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। जब कई बड़े कोइरी नेता, जिनमें Upendra Kushwaha भी शामिल हैं, अलग राह पर चले गए, तब भी कुशवाहा ने पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी। यही कारण है कि संगठन में उनकी स्थिति और मजबूत हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह चुनाव ऐसे समय हुआ है जब बिहार की राजनीति में कई घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे माहौल में कुशवाहा का निर्विरोध अध्यक्ष बनना पार्टी के भीतर एकजुटता और नेतृत्व पर भरोसे का संकेत माना जा रहा है।

