खेत में युवती के साथ इस नेता का वीडियो वायरल, मचा हड़कंप; ग्रामीण बोले- आपत्तिजनक स्थिति में थे...
Sunday, Apr 05, 2026-04:03 PM (IST)
Bihar News: बिहार के सारण जिले में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के एक स्थानीय नेता का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है। मढ़ौरा प्रखंड अध्यक्ष बलिराम सिंह उर्फ गामा सिंह एक युवती के साथ सुनसान खेत में देखे गए, जिसे स्थानीय युवकों ने कैमरे में कैद कर लिया। जहां एक ओर ग्रामीण इसे 'आपत्तिजनक' स्थिति बता रहे हैं, वहीं JDU नेता और युवती दोनों ने सामने आकर इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सुरक्षा और मदद का मामला बताया है।
वायरल वीडियो में क्या है?
शनिवार देर रात का बताया जा रहा यह वीडियो किसी फिल्म के ड्रामेटिक सीन जैसा प्रतीत होता है। वीडियो में कुछ युवक शोर मचाते हुए एक युवती का पीछा कर रहे हैं। घबराई हुई युवती भागते हुए अधेड़ उम्र के गामा सिंह के पास पहुंचती है। वीडियो के एक हिस्से में युवती अपना चेहरा छिपाने की कोशिश करती है और मोबाइल से रिकॉर्डिंग कर रहे युवकों पर चप्पल तानकर उन्हें खदेड़ने का प्रयास भी करती है। अंत में गामा सिंह युवती को अपने साथ सुरक्षित स्थान की ओर ले जाते दिख रहे हैं।
गामा सिंह की सफाई
वीडियो वायरल होने और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज होने के बाद गामा सिंह ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने इसे विरोधियों की राजनीतिक साजिश करार दिया। उन्होंने कहा, "मैं छपरा से लौटकर देर रात अपने खेत में गेहूं की कटाई देखने गया था। वहां मैंने देखा कि कुछ लड़के एक लड़की को परेशान कर रहे हैं और वीडियो बना रहे हैं। वह बच्ची डरी हुई थी और मदद के लिए मेरे पास आई। मैंने बस उसे सुरक्षित सड़क तक पहुँचाया। मुझ पर लगे आरोप निराधार हैं।"
युवती का बयान
मामले में मोड़ तब आया जब वीडियो में दिख रही युवती ने भी बयान जारी किया। उसने वीडियो बनाने वाले युवकों पर ही गंभीर आरोप लगाए। युवती के अनुसार, वह बाजार से लौट रही थी और रास्ते में शौच के लिए खेत की तरफ गई थी, तभी कुछ मनचलों ने उसे घेर लिया और परेशान करने लगे। खुद को बचाने के लिए वह भागी और पास में मौजूद गामा सिंह से मदद मांगी।
राजनीतिक सरगर्मी
भले ही नेता और युवती ने सफाई दे दी हो, लेकिन विपक्ष और सोशल मीडिया पर जेडीयू नेता को लेकर तीखी टिप्पणियां की जा रही हैं। मढ़ौरा पुलिस ने अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है और न ही किसी पक्ष की ओर से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई है। स्थानीय लोग इस घटना को आगामी चुनावों से पहले छवि खराब करने की कोशिश और नैतिक पतन के बीच की बहस के रूप में देख रहे हैं।

