बिहार-झारखंड में Air Ambulance हादसों का क्या है पैटर्न? क्या मौसम और एयर ट्रैफिक बढ़ा रहे हैं खतरा?

Wednesday, Feb 25, 2026-04:45 PM (IST)

Jharkhand News: झारखंड की राजधानी रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एंबुलेंस सोमवार शाम दुर्घटनाग्रस्त हो गई। यह हादसा चतरा जिले के जंगलों में हुआ, जिसमें मरीज समेत 7 लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है और एयर एंबुलेंस सेवाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या हुआ हादसे वाले दिन?

एयर एंबुलेंस ने शाम 7 बजकर 11 मिनट पर बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। इसमें लातेहार के चंदवा निवासी 41 वर्षीय संजय कुमार को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाया जा रहा था। वह करीब 65 प्रतिशत झुलस चुके थे। उड़ान भरने के करीब 20 मिनट बाद विमान ने कोलकाता एटीसी से खराब मौसम के कारण रास्ता बदलने की अनुमति मांगी। लेकिन इसके एक मिनट बाद ही विमान रडार से गायब हो गया। देर रात उसका मलबा चतरा जिले के सिमरिया ब्लॉक के जंगलों में मिला। हादसे में मरीज, डॉक्टर, पैरामेडिक स्टाफ और दोनों पायलटों की मौत हो गई।

खराब मौसम हादसे की बड़ी वजह

मामले की जांच नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) कर रहे हैं। शुरुआती जानकारी में खराब मौसम को हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है। हालांकि तकनीकी खराबी की भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि मेडिकल इमरजेंसी के दबाव में कई बार जोखिम भरे मौसम में भी उड़ान भरनी पड़ती है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।

क्या कहता है पिछले हादसों का रिकॉर्ड?

पिछले 15 वर्षों में बिहार और झारखंड से दिल्ली-एनसीआर आने वाली एयर एंबुलेंस के कम से कम तीन बड़े हादसे सामने आए हैं। इनमें दो हादसे घातक साबित हुए। इन घटनाओं में 17 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन हादसों में कुछ समान कारण सामने आते हैं:

  • खराब मौसम और अचानक बदलता मौसम पैटर्न

 

  • घने जंगल और पहाड़ी इलाके

 

  • छोटे और पुराने विमान (जैसे Beechcraft C90)

 

  • मेडिकल इमरजेंसी का दबाव

 

  • सीमित नाइट ऑपरेशन सुविधाएं


क्यों जोखिम भरी मानी जाती हैं रांची-पटना की उड़ानें?
1. बदलता मौसम

  • झारखंड और बिहार के इलाकों में मानसून और सर्दियों के दौरान अचानक मौसम बदल जाता है। घना कोहरा, आंधी और बारिश उड़ान को खतरनाक बना सकते हैं।


2. भौगोलिक स्थिति

  • रांची के आसपास पहाड़ी और जंगल क्षेत्र है। खराब विजिबिलिटी में नेविगेशन मुश्किल हो सकता है।


3. एयर ट्रैफिक और डायवर्जन

  • कभी-कभी खराब मौसम के कारण विमानों को लंबा रास्ता लेना पड़ता है। इससे ईंधन, ऊंचाई और समय का दबाव बढ़ता है।


4. छोटे विमान, ज्यादा जोखिम

  • एयर एंबुलेंस में अक्सर छोटे टर्बोप्रॉप विमान इस्तेमाल होते हैं। ये बड़े जेट विमानों की तुलना में खराब मौसम में ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं।


बड़े सवाल

  • क्या मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर जोखिम ज्यादा लिया जा रहा है?

 

  • क्या पुराने विमानों की फिटनेस जांच पर्याप्त है?

 

  • क्या छोटे शहरों के एयरपोर्ट पर आधुनिक नेविगेशन सिस्टम की कमी है?


यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि भारत में एयर एंबुलेंस सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही असली कारण साफ हो पाएगा, लेकिन फिलहाल यह साफ है कि मौसम, तकनीक और ऑपरेशन से जुड़ी चुनौतियों पर फिर से गंभीरता से काम करने की जरूरत है।


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Content Editor

Khushi

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