Child Health Bihar: लाखों खर्च कर बिहार सरकार बचाएगी 6 मासूम जिंदगियां, जानिए कैसे
Saturday, Jan 10, 2026-09:02 PM (IST)
पटना:थैलेसीमिया पीड़िता 06 बच्चों का नया बैच 13 जनवरी को बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) के लिए वेल्लोर रवाना होगा। यह पीड़ित बच्चों का चौथा बैच होगा। इससे पहले अलग-अलग समय में 26 बच्चों का सफलतापूर्वक इलाज हो चुका है।
राज्य सरकार की तरफ से थैलेसीमिया, हीमोफिलिया एवं सिकल सेल एनीमिया के मरीजों के लिए आवश्यक सुविधा सुनिश्चित कराने के लिए कई स्तर पर काम किए जा रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से एकीकृत डे केयर केंद्रों की स्थापना और यहां जांच, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, एंटी हेमोफिलिक फैक्टर (एएचएफ) ट्रांसफ्यूजन, आयरन चेलेटिंग आदि की दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
इसी क्रम में राज्य सरकार ने 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए मुख्यमंत्री बाल थैलेसीमिया योजना चला रखी है। इसके तहत तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) के साथ सरकार का समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुआ है। इस संस्थान में बीमारी से पीड़ित बच्चों का निशुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराया जाता है।
इस योजना के तहत अभी तक कुल 26 बच्चों में सफलतापूर्वक बोन मैरो ट्रांसप्लांट हो चुका है। पहली बार विभागीय मंत्री के साथ 13 बच्चों का बैच 2024-25 में इलाज के लिए वेल्लोर भेजा गया था।
तीन महीने के बाद दो साल तक नियमित जांच
राज्य स्वास्थ्य समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि बीएमटी के लिए जाने वाले बच्चे अपने परिजनों के साथ तीन महीने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की देखरेख में वेल्लोर में रहेंगे। इसके बाद उनकी वापसी होगी। पदाधिकारियों ने बताया कि इलाज के बाद लौटने वाले बच्चों को दो साल तक नियमित जांच के लिए सीएमसी जाना होगा।
15 लाख वहन करती है सरकार
थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराने के साथ ही इलाज की प्रकिया पूरी कराने के लिए सरकार प्रति मरीज 15 लाख रुपए खर्च करती है। इस राशि में मरीज, डोनर व माता-पिता के आने-जाने, अस्पताल में इलाज, वेल्लोर में रहने, खाने-पीने आदि का खर्च शामिल है।
इन जिलों से बीएमटी के लिए वेल्लोर जाएंगे बच्चे
- मधुबनी-01
- मुजफ्फरपुर-01
- मधेपुरा-01
- सीतामढ़ी-01
- खगरिया-01
- पूर्वी चंपारण-01

