''लेडी सिंघम'' ने क्यों छोड़ी खाकी? 18 महीने बाद IPS काम्या मिश्रा ने सुनाया अपने इस्तीफे का असली सच

Thursday, Feb 05, 2026-02:07 PM (IST)

IPS Kamya Mishra : बिहार कैडर की तेज-तर्रार और चर्चित पूर्व IPS अधिकारी काम्या मिश्रा (Kamya Mishra), जिन्होंने अपनी कार्यशैली से अपराधियों के मन में खौफ पैदा कर दिया था, एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। अगस्त 2024 में अपने अचानक दिए गए इस्तीफे से सबको हैरान करने वाली काम्या ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है। एक टेड-टॉक (TEDx) के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्दी छोड़ना उनके लिए कोई 'हार' नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत और बदलाव की ओर बढ़ता हुआ कदम था। 

पुलिसिंग का अनुभव: 'मैजिकल रियलिज्म' के समान 

काम्या मिश्रा ने अपने पुलिस करियर को "जादुई यथार्थवाद" (Magical Realism) करार दिया। उन्होंने बताया कि ओडिशा के एक छोटे से कस्बे से निकलकर 23 साल की उम्र में देश की सबसे कठिन परीक्षा पास करना और फिर बिहार जैसे राज्य में चुनौतीपूर्ण पोस्टिंग संभालना, किसी फिल्मी कहानी जैसा था। 

उनके करियर के मुख्य पड़ाव: 

  • शुरुआत: वैशाली के लालगंज में बतौर SHO कमान संभाली। 
  • पहचान: पटना में ASP सदर और सचिवालय SP के रूप में अपनी कड़क छवि बनाई। 
  • नेतृत्व: दरभंगा रूरल SP के तौर पर बड़े ऑपरेशन्स को लीड किया। 

खाकी के पीछे का मानसिक दबाव 

अक्सर पुलिस अधिकारियों की बहादुरी की चर्चा होती है, लेकिन काम्या ने उस "मानसिक थकान" पर बात की जिसे अमूमन नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि एक पुलिसकर्मी का जीवन समाज की उन बुराइयों और दुखों को हर दिन साफ करने जैसा है, जिसे आम लोग देखना भी पसंद नहीं करते। काम्या ने कहा-  
"जब दुनिया जश्न मनाती है, तब पुलिस दंगों को रोकने के लिए सड़कों पर होती है। अपनों को अपनी आंखों के सामने खोना और हर दिन इंसानी दर्द से रूबरू होना भावनात्मक रूप से थका देने वाला होता है।" 

इस्तीफे की असली वजह 

इस्तीफे की असली वजह बताते हुए उन्होंने एक बेहद गहरा उदाहरण दिया। काम्या ने कहा कि "सत्ता और अधिकारों को कसकर पकड़ना (मुट्ठी बंद करना) दर्दनाक हो सकता है। मुट्ठी खोलना हार नहीं, बल्कि कुछ नया थामने के लिए जगह बनाना है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य अब सिस्टम के भीतर रहकर नहीं, बल्कि शिक्षा और रोजगार के माध्यम से सिस्टम के बाहर खड़े होकर समाज को सशक्त बनाना है। 

नया मिशन: अपराध से शिक्षा की ओर 

काम्या मिश्रा ने साझा किया कि अपराधियों से पूछताछ के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि अगर इन लोगों को बचपन में सही अवसर और शिक्षा मिली होती, तो वे आज सलाखों के पीछे नहीं होते। इसी सोच के साथ अब वह शिक्षा के क्षेत्र में काम करना चाहती हैं। उनका मानना है कि असली आजादी किसी पद में नहीं, बल्कि अपने जीवन का उद्देश्य खुद तय करने में है।


 


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Ramanjot

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