जन्म के तुरंत बाद बच्चे को बेचने की कोशिश, लाखों रुपए में हुई थी डील, माता-पिता समेत 5 लोग गिरफ्तार

Tuesday, Aug 25, 2026-05:30 PM (IST)

मोतिहारी: बिहार के पूर्वी चंपारण जिला मुख्यालय मोतिहारी में सदर अस्पताल चौक के समीप जन्म के कुछ ही घंटे बाद नवजात बच्चे का डेढ़ लाख रुपए में सौदा किए जाने की सूचना पर नगर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया। पुलिस ने मौके से सौदे की रकम 1.50 लाख रुपए नकद भी जब्त की है। मामले में नवजात के माता-पिता, कथित खरीदार महिला, बिचौलिया और एक आशा कार्यकर्ता समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 

नगर थानाध्यक्ष राजीव रंजन के नेतृत्व में पुलिस ने सूचना के आधार पर सदर अस्पताल चौक के समीप घेराबंदी कर कार्रवाई की। पुलिस के पहुंचते ही कथित तौर पर नवजात को खरीदने-बेचने में शामिल लोग मौके पर पकड़े गए। बच्चे को तत्काल अपने संरक्षण में लेकर पुलिस ने उसे सुरक्षित बरामद कर लिया। पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, हरसिद्धि थाना क्षेत्र के पकड़िया टोला निवासी प्रमोद साहनी और उनकी पत्नी इंदू देवी के पहले से छह बच्चे हैं। इंदू देवी ने सोमवार को सदर अस्पताल चौक की गली नंबर एक स्थित एक निजी अस्पताल में नवजात को जन्म दिया था। पुलिस का दावा है कि बच्चे के जन्म से पहले ही उसकी कथित बिक्री की तैयारी कर ली गई थी। जन्म के बाद बच्चे को कथित तौर पर घोड़ासहन थाना क्षेत्र के लैन बसवरिया निवासी चिंता देवी को सौंपने की तैयारी थी। चिंता देवी के निसंतान होने की बात सामने आई है। 

पुलिस के अनुसार, बच्चे के बदले डेढ़ लाख रुपए का लेन-देन किया गया। पुलिस ने इस मामले में मोतिहारी नगर थाना क्षेत्र के बलुआ गोपालपुर निवासी तान्या खातून उर्फ कुरेशा खातून तथा घोड़ासहन थाना क्षेत्र के बगहा निवासी आशा कार्यकर्ता शोभा सिंह को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस प्रारंभिक जांच में दोनों की कथित भूमिका को सौदा कराने और बच्चे को खरीदार तक पहुंचाने से जोड़कर देख रही है। नगर थानाध्यक्ष राजीव रंजन के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में बच्चे के माता-पिता प्रमोद साहनी और इंदू देवी, कथित बिचौलिया तान्या खातून उर्फ कुरेशा खातून, आशा कार्यकर्ता शोभा सिंह तथा नवजात को कथित तौर पर खरीदने वाली चिंता देवी शामिल हैं। पुलिस ने सभी के पास से नवजात और डेढ़ लाख रुपए बरामद किए हैं। 

नवजात की कथित खरीद-बिक्री का मामला सामने आने के बाद पुलिस अब इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क की तलाश में जुट गई है। जांच की जा रही है कि इस पूरे प्रकरण में निजी अस्पताल अथवा अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की कोई भूमिका थी या नहीं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि गिरफ्तार आरोपी इससे पहले भी नवजात बच्चों की खरीद-बिक्री अथवा इस तरह के किसी अन्य मामले में शामिल रहे हैं या नहीं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच और पूछताछ के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही, नवजात की कथित खरीद-बिक्री के पीछे किसी संगठित गिरोह के सक्रिय होने की आशंका को भी जांच के दायरे में रखा गया है। नवजात के सकुशल बरामद होने से पुलिस ने फिलहाल बड़ी घटना को टाल दिया है। पांचों आरोपियों से पूछताछ कर पुलिस पूरे नेटवर्क और इस कथित सौदे के पीछे की वास्तविक वजह का पता लगाने में जुटी है। 


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Content Writer

Ramanjot

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