अब जीविका दीदियों के हाथों सिली पोशाक पहनेंगे आंगनबाड़ी बच्चे, 10 लाख पोशाक वितरित

Saturday, Apr 11, 2026-04:20 PM (IST)

Bihar News : बिहार सरकार की तरफ से जीविका दीदियों को प्रोत्साहन देने की प्रतिबद्धता की एक कड़ी के रूप में उनके हाथों से सिले हुए 10 लाख पोशाक विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को वितरित किये जा चुके हैं। बिहार सरकार की पहल के बाद अब आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को बाजार से खरीदी गई तैयार पोशाक के बजाय जीविका दीदियों द्वारा घरेलू स्तर पर सिली हुई गुणवत्तापूर्ण पोशाक उपलब्ध कराई जा रही है। इसके तहत अब तक 10 लाख से अधिक पोशाक सेट का वितरण आंगनबाड़ी केंद्रों में किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त पूरे प्रदेश में 1000 से अधिक विद्यालय स्तर पर बच्चों की पोशाक की सिलाई का कार्य जीविका दीदियों के माध्यम से चल रहा है।

सरकार की तरफ से महिलाओ को रोजगार देने की योजना के तहत इस पहल का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण महिलाओं को हुआ है। हजारों जीविका दीदियों को अपने घर के पास ही सिलाई का काम मिल रहा है, जिससे उन्हें औसतन 10 हजार रुपये प्रति माह की आमदनी हो रही है। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास और स्वावलंबन की भावना भी बढ़ रही है। 

सरकार की तरफ से जारी जानकारी के अनुसार, राज्य में करीब 1.5 लाख महिलाएं वर्तमान में इस सिलाई कार्य से जुड़ी हुई हैं और आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। कई जिलों में‘सिलाई घर'या प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां दीदियों को आधुनिक मशीनों और कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। बिहार सरकार की यह पहल सिफर् रोजगार सृजन तक सीमित नहीं है। पहले बच्चों के लिए बनाई जा रही पोषक गुणवत्ता की द्दष्टि से अच्छी नही थी, लेकिन जीविका दीदियों की बनाई पोषक बेहतर है और आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों को अब एकसमान, टिकाऊ और अच्छी क्वालिटी की पोशाक मिल रही है। इस सुविधा से प्रदेश में लगभग 1.13 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों में करीब 50 लाख बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि जीविका रसोई के बाद जीविका पोशाक की की पहल ने जीविका समूह की दीदियों को रोजगार के बड़े अवसर प्रदान किये हैं और सरकार ने भी महिला सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया है।


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Content Editor

Harman

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